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रेनू ने रचा इतिहास, 9 फीट लंबे बालों से बनाया रिकॉर्ड

10 साल नहीं कटवाए बाल, 271.5 सेंटीमीटर लंबाई के साथ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

हल्द्वानी। लंबे और घने बालों को भारतीय संस्कृति में महिलाओं की खूबसूरती और पहचान से जोड़कर देखा जाता है। इसी परंपरा से प्रेरणा लेकर हल्द्वानी की रेनू धारियाल ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने उत्तराखंड का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया। रेनू ने करीब 9 फीट (271.5 सेंटीमीटर) लंबे बालों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

हल्द्वानी के कटघरिया क्षेत्र की रहने वाली रेनू ने वर्ष 2015 से अपने बाल नहीं कटवाए। करीब एक दशक तक धैर्य और नियमित देखभाल के बाद उनके बाल इस रिकॉर्ड लंबाई तक पहुंचे। 15 अप्रैल 2026 को उनके बालों की लंबाई का सत्यापन किया गया था। इसके बाद 7 अगस्त 2026 को उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

पुराना रिकॉर्ड भी किया पीछे

रेनू ने यूक्रेन की आलिया नासिरोवा का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा है। आलिया के बालों की लंबाई 257.33 सेंटीमीटर दर्ज की गई थी, जबकि रेनू के बाल 271.5 सेंटीमीटर लंबे पाए गए। इस तरह रेनू ने करीब 14 सेंटीमीटर के अंतर से नया रिकॉर्ड कायम किया।

भारतीय संस्कृति से मिली लंबे बाल रखने की प्रेरणा

रेनू के मुताबिक, उन्होंने लंबे बाल सिर्फ विश्व रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से नहीं बढ़ाए। भारतीय संस्कृति और परंपरा से प्रेरित होकर उन्होंने लंबे बाल रखने का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को उन्होंने वर्षों तक कायम रखा और बालों को काटने के बजाय उनकी नियमित देखभाल पर ध्यान दिया।

रेनू ने बालों की देखभाल में रासायनिक उत्पादों से दूरी बनाए रखी। वह घर पर तैयार किए गए हर्बल तेल और शैंपू का इस्तेमाल करती हैं। उनका मानना है कि लंबे और घने बालों के लिए किसी शॉर्टकट के बजाय धैर्य, अनुशासन और नियमित देखभाल सबसे जरूरी है।

बाल संभालने में लग जाते हैं कई घंटे

रेनू कंटेंट क्रिएटर और यूट्यूबर भी हैं। वह सोशल मीडिया के माध्यम से अपने लंबे बालों की देखभाल से जुड़े अनुभव और तरीके लोगों के साथ साझा करती हैं। हालांकि, इतने लंबे बालों को संभालना उनके लिए आसान नहीं है। बालों को सुलझाने, धोने और उनकी देखभाल में कई घंटे तक लग जाते हैं।

करीब 10 साल की मेहनत, धैर्य और संकल्प के बाद रेनू धारियाल ने अपने बालों को विश्व रिकॉर्ड की लंबाई तक पहुंचाया। उनका यह रिकॉर्ड न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उत्तराखंड के लिए भी गौरव का विषय है।

 

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