
आधी रात CM धामी को X पर किया पोस्ट, जमीन दिलाने में मांगी मदद, पंत की मांग पर उठे कई सवाल
अब उठ रहा बड़ा सवाल—‘खास’ खिलाड़ी के लिए खास रियायत क्यों?
रुड़की में पैतृक घर, पिथौरागढ़ में पुश्तैनी जड़ें; उत्तराखंड के कई खिलाड़ी देश-दुनिया में नाम कमा चुके, उनके लिए नहीं तो फिर पंत के लिए अलग व्यवस्था क्यों?
देहरादून। भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे ऋषभ पंत का उत्तराखंड में बसने का सपना अब चर्चा का विषय बन गया है। पंत ने शनिवार देर रात करीब 1:15 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए उत्तराखंड में जमीन खरीदने को लेकर मदद मांगी। मुख्यमंत्री की ओर से भी उन्हें हर संभव सहयोग का भरोसा दिया गया।
पंत की इच्छा पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। वह उत्तराखंड के मूल निवासी हैं, उनकी जड़ें प्रदेश से जुड़ी हैं और अपने गृह राज्य में घर बनाना उनका अधिकार और निजी इच्छा है। लेकिन उनकी अपील के बाद एक दूसरा सवाल भी खड़ा हो गया है—क्या स्टार क्रिकेटर होने के कारण उनके लिए जमीन के मामले में कोई विशेष व्यवस्था होनी चाहिए?
जब अपने ही घर में जमीन है तो नई जमीन क्यों?
ऋषभ पंत का उत्तराखंड से रिश्ता केवल जन्म या पहचान तक सीमित नहीं है। रुड़की में उनका पैतृक घर है। करीब दो से ढाई हजार वर्ग गज में फैले इस आवास में उनके पिता स्व. राजेंद्र पंत ने न्यू मॉडर्न पब्लिक स्कूल भी संचालित किया था। उनकी मां आज भी इसी घर में रहती हैं और ऋषभ का जन्म भी यहीं हुआ।
दूसरी ओर पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र के पाली गांव से भी पंत परिवार की पुश्तैनी जड़ें जुड़ी हैं। गांव में उनके चाचा रहते हैं और परिवार के पुराने मकान की जगह नया घर बनाने की तैयारी की बात भी सामने आई है।
ऐसे में यदि पंत उत्तराखंड में किसी नए स्थान पर अपना आशियाना बनाना चाहते हैं तो यह उनकी निजी पसंद हो सकती है। वह अपनी पसंद और जरूरत के मुताबिक जमीन खरीद सकते हैं। असली सवाल तब पैदा होता है, जब इस निजी जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार से विशेष रूप से जमीन उपलब्ध कराने या रियायती दर पर जमीन देने की बात सामने आती है।
उत्तराखंड में सिर्फ पंत ही नहीं, कई खिलाड़ियों ने बढ़ाया मान
ऋषभ पंत निश्चित रूप से उत्तराखंड के सबसे चर्चित खेल सितारों में हैं। लेकिन प्रदेश ने ऐसे कई खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का नाम रोशन किया है। क्रिकेट में एकता बिष्ट और मानसी जोशी जैसे नाम हैं, जबकि अलग-अलग खेलों में उत्तराखंड के अनेक खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना चुके हैं। राज्य सरकार के खेल विभाग की सूची में भी विश्व कप स्तर के उत्तराखंडी खिलाड़ियों का उल्लेख है।
ऐसे में सवाल यह है कि इन खिलाड़ियों में से कितनों को सरकार ने घर बनाने के लिए जमीन दी? कितनों को जमीन खरीदने के लिए विशेष रियायत मिली?
अगर किसी खिलाड़ी को उसकी उपलब्धियों के आधार पर जमीन या दूसरी विशेष सुविधा देने की कोई स्पष्ट सरकारी नीति है तो वह नीति सभी पात्र खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। और अगर ऐसी कोई नीति नहीं है तो सिर्फ लोकप्रियता के आधार पर किसी एक खिलाड़ी के लिए अलग व्यवस्था क्यों?
करोड़ों कमाने वाले खिलाड़ी को सरकारी दर की जमीन क्यों?
ऋषभ पंत ने क्रिकेट में अपनी मेहनत से बहुत बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनकी आर्थिक स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि उन्हें जमीन खरीदनी है तो सामान्य बाजार व्यवस्था के तहत क्यों नहीं?
सरकार चाहे तो जमीन तलाशने, नियमों की जानकारी देने और प्रशासनिक प्रक्रिया में मदद कर सकती है। लेकिन अगर सरकारी जमीन को बाजार मूल्य से कम दर पर किसी खास व्यक्ति को देने का फैसला होता है तो उसका आधार सार्वजनिक होना चाहिए।
क्योंकि सवाल केवल ऋषभ पंत का नहीं होगा। सवाल उन हजारों युवाओं का भी होगा जो उत्तराखंड में रहते हैं, यहीं नौकरी करते हैं, यहीं अपना घर बनाना चाहते हैं और जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाते हैं।
आधी रात की अपील ने भी खींचा ध्यान
पंत की पोस्ट का समय भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। रात करीब 1:15 बजे मुख्यमंत्री को सीधे एक्स पर टैग कर जमीन के मामले में मदद मांगना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से अलग दिखाई देता है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
हालांकि, पोस्ट देर रात किए जाने को लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। असली मुद्दा यह है कि अगर किसी बड़े खिलाड़ी को सरकारी स्तर पर मदद की जरूरत महसूस हुई है तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि मदद किस नियम के तहत और किस रूप में दी जाएगी।
पंत का सम्मान अपनी जगह, नियमों की समानता अपनी जगह
ऋषभ पंत उत्तराखंड का गौरव हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनका उत्तराखंड लौटकर यहां घर बनाना निश्चित रूप से खुशी की बात होगी। सरकार को भी उनके लिए नियमानुसार सहयोग करना चाहिए लेकिन सम्मान और विशेषाधिकार में फर्क होता है।
अगर पंत अपनी जमीन खरीदकर घर बनाते हैं तो यह उनका निजी फैसला है। अगर सरकार उनकी जमीन तलाशने में मदद करती है तो भी इसमें कोई समस्या नहीं। लेकिन अगर सरकारी जमीन, सरकारी दर या किसी विशेष रियायत की बात आती है तो वही सुविधा उन खिलाड़ियों के लिए भी उपलब्ध होनी चाहिए जिन्होंने उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
आखिर सवाल यही है—ऋषभ पंत को उत्तराखंड में घर जरूर मिलना चाहिए, लेकिन क्या सिर्फ इसलिए कि वह बड़े क्रिकेट स्टार हैं, उन्हें ऐसी जमीन या ऐसी कीमत मिलनी चाहिए जो आम उत्तराखंडी और दूसरे खिलाड़ियों को उपलब्ध नहीं है?
यही वह सवाल है जिसका जवाब सरकार की ओर से साफ और पारदर्शी तरीके से आना चाहिए।




