
देहरादून। सरकारी नौकरी पाने के लिए जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सहारा लेने वाले अस्थायी लिपिक अनुज रावत के खिलाफ महालेखाकार (लेखापरीक्षा) उत्तराखंड कार्यालय ने एफआईआर दर्ज कराई है। मामला गढ़ी कैंट थाने में दर्ज हुआ है।
जानकारी के अनुसार मोहकमपुर माजरी माफी, कलिंका विहार निवासी अनुज रावत को खेल कोटे से अस्थायी लिपिक पद पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के समय उसने त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से कथित तौर पर जारी 12वीं का उत्तीर्ण व अंक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। लेकिन सत्यापन के दौरान बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया कि अनुज का प्रमाणपत्र पूरी तरह जाली है और अभिलेखों में उसका कोई नाम दर्ज ही नहीं है।
इस पर महालेखाकार कार्यालय ने अनुज की नियुक्ति को शून्य घोषित कर 26 जून 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया। साथ ही धोखाधड़ी और जालसाजी को गंभीर अपराध मानते हुए पुलिस से कार्रवाई की सिफारिश की।
कार्यालय ने स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरी पाने के लिए जाली दस्तावेज प्रस्तुत करना भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दंडनीय अपराध है। अब अनुज रावत पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




