डबल झटका! पेट्रोल-डीजल और सोना-चांदी में रिकॉर्ड उछाल की आशंका
पश्चिम एशिया तनाव से तेल 100 डॉलर की ओर बढ़ने की आशंका

अमेरिका–ईरान युद्ध के बीच महंगाई की आशंका
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों की धड़कनें तेज कर दी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों तथा इज़राइल की भूमिका के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ब्रेंट कच्चा तेल 72–73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है और विशेषज्ञ मान रहे हैं कि हालात बिगड़ने पर इसमें और तेजी आ सकती है।भारत पर सीधा असर
भारत पर सीधा असर
अपनी जरूरत का लगभग 85–90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल का सीधा असर घरेलू पेट्रोल और डीजल दरों पर पड़ता है। फिलहाल दरें स्थिर हैं, लेकिन यदि तनाव लंबा खिंचता है तो आने वाले हफ्तों में बढ़ोतरी संभव है।
1 मार्च 2026 तक प्रमुख शहरों में दरें:
दिल्ली: पेट्रोल 94.72–94.77 रु./लीटर, डीजल 87.62–87.67 रु./लीटर
मुंबई: पेट्रोल 103.50–104.21 रु./लीटर, डीजल 90.03–92.15 रु./लीटर
तेल कंपनियां रोजाना समीक्षा करती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उछाल का असर आमतौर पर 1–2 हफ्तों में दिखता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना निर्णायक कारक
सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है, जहां से दुनिया के कुल तेल परिवहन का करीब 20% गुजरता है। यदि यहां आपूर्ति बाधित होती है तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है। ऐसी स्थिति में भारत का आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा गहरा सकता है और रुपये पर दबाव बढ़ेगा।
विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि कच्चे तेल में 10–20 डॉलर की और तेजी आती है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल 5–15 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं।
सोना-चांदी भी रिकॉर्ड की ओर?
तेल के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी जबरदस्त तेजी के संकेत हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक मौजूदा करीब 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का सोना बढ़कर 1.90 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं चांदी 2.67 लाख रुपये प्रति किलो से उछलकर 3.50 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकती है।
युद्ध या वैश्विक संकट के समय निवेशक जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोने को पारंपरिक रूप से “सेफ हेवन” माना जाता है, इसलिए तनाव बढ़ते ही इसकी मांग तेज हो जाती है।
महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के सामान पर पड़ेगा। महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका के बीच भारतीय रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति पर सतर्क रुख अपनाना पड़ सकता है।
हालांकि भारत के पास सामरिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं, जो सीमित समय तक राहत दे सकते हैं। सरकार जरूरत पड़ने पर टैक्स में कटौती जैसे कदम उठाकर झटका कम करने की कोशिश कर सकती है।
कुल मिलाकर, यदि पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है तो असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा—पेट्रोल-डीजल से लेकर सोना-चांदी तक, हर मोर्चे पर कीमतों की आग आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।



