
रुड़की की मदरहुड यूनिवर्सिटी में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर नेशनल सेमिनार, ‘विधिक चौपाल’ में गूंजा सनातन ज्ञान का संदेश
संविधान, शिक्षा नीति और डेटा संरक्षण पर गहन चर्चा
रुड़की: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रुड़की स्थित मदरहुड यूनिवर्सिटी में नेशनल सेमिनार का आयोजन “राष्ट्रीय विधिक चौपाल” के रूप में किया गया। कार्यक्रम में कानून, मीडिया और समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर गहन विमर्श हुआ, जिसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
सेमिनार के विशिष्ट अतिथि उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के विधि प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि “सनातन ज्ञान में ही विश्व का भविष्य निहित है। आज वैश्विक अस्थिरता के दौर में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश ही शांति का मार्ग दिखा सकता है। प्रेम बुद्ध से करो, युद्ध से नहीं।” उन्होंने ईरान-अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय तनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि बुद्ध का ज्ञान ही युद्धों को समाप्त कर सकता है।
पहला सत्र: परंपरा से आधुनिकता तक की चर्चा
सेमिनार के प्रथम सत्र में संकाय डीन डॉ. बोधिसत्व आचार्य ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि, असम राज्यपाल के सलाहकार प्रोफेसर हरबंश दीक्षित ने “मनुस्मृति से लेकर कौटिल्य के अर्थशास्त्र” तक भारतीय विधिक परंपराओं की विस्तार से व्याख्या की।
विशेष अतिथि, उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा समिति के प्रोफेसर देवेंद्र भसीन ने नई शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख विशेषताओं और उसके प्रभावों पर प्रकाश डाला। वहीं, यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र शर्मा ने विधि और विधि के शासन (Rule of Law) की वर्तमान प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।
दूसरा सत्र: डिजिटल युग की चुनौतियों पर फोकस
द्वितीय सत्र में पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी देहरादून की एसोसिएट प्रोफेसर गगनदीप कौर ने डेटा संरक्षण और गोपनीयता से जुड़े DPDP Act 2023 पर विस्तृत जानकारी दी। लॉ कॉलेज देहरादून की प्रोफेसर प्रिया लक्ष्मी ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में “विद्या दान” की अवधारणा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने साइबर अपराध और डेटा चोरी जैसी बढ़ती चुनौतियों पर चिंता जताते हुए मीडिया की भूमिका को अहम बताया और जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।
300 से अधिक छात्रों की भागीदारी
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपशिखा ने किया। सेमिनार में विधि प्रोफेसर जे.एस.पी. श्रीवास्तव, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. राहुल वर्मा, श्रीमती व्यंजना सैनी, विभागाध्यक्ष डॉ. सिंह सहित करीब 300 विधि छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
यह नेशनल सेमिनार न केवल विधिक शिक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता पर केंद्रित रहा, बल्कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल युग की चुनौतियों और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई।




