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उत्तराखंड रजत जयंती गीत के रचयिता डॉ. अनिल दीक्षित सम्मानित

"प्यारा है उत्तराखंड दिल से" रजत जयंती उत्सव गीत बना उत्तरांचल यूनिवर्सिटी की उपलब्धि

उत्तरांचल यूनिवर्सिटी ने डॉ. अनिल कुमार दीक्षित को किया सम्मानित, रजत जयंती गीत के लिए मिला प्रशस्ति पत्र व सम्मान राशि

देहरादून। उत्तराखंड राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर रचित उत्सव गीत “कहो फिर से : प्यारा है उत्तराखंड दिल से” के रचयिता एवं उत्तरांचल यूनिवर्सिटी की साहित्यिक समिति के चेयरपर्सन डॉ. अनिल कुमार दीक्षित को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सम्मानित किया। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान राशि का चेक प्रदान कर सम्मानित किया।

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डॉ. दीक्षित द्वारा लिखे गए इस उत्सव गीत को उत्तरांचल यूनिवर्सिटी ने रिलीज किया था। गीत को प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी सराहना मिल रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

विश्वविद्यालय के फाउंडर्स डे समारोह के दौरान आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार दीक्षित को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 150 से अधिक शिक्षकों को भी उनके नवाचार, शैक्षणिक योगदान और उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान राशि के चेक प्रदान किए गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट अंकिता जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष ने प्रदेशवासियों को नई प्रेरणा और ऊर्जा प्रदान की है तथा हम सभी को उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है।

स्टूडेंट्स वेलफेयर एवं आईटी डायरेक्टर डॉ. अभिषेक जोशी ने कहा कि बाबा केदार और बदरी विशाल के आशीर्वाद से रजत जयंती वर्ष में प्रदेशवासियों के भीतर नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष के साक्षी बनना और उससे जुड़े सांस्कृतिक अभियान का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी ने कहा कि तकनीक, नवाचार, स्टार्टअप, खेल, संस्कृति और सेवा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अनुराधा जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड को विकास, प्रकृति, विज्ञान, संस्कृति, आधुनिकता और परंपरा के संतुलित संगम के रूप में देश का आदर्श राज्य बनाने का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत माता हमारी मातृभूमि है और उत्तराखंड देवभूमि के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। इस दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक है।”

फाउंडर्स डे समारोह में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्द्र जोशी, वाइस प्रेसिडेंट अंकिता जोशी, आईटी डायरेक्टर प्रो. अभिषेक जोशी, कुलपति प्रो. धरम बुद्धि, प्रति कुलपति डॉ. राजेश बहुगुणा, रजिस्ट्रार डॉ. अनुज राणा सहित विभिन्न विभागों के डीन, निदेशक, आचार्य, उपाचार्य एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

 

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