सिर्फ सड़कें नहीं, बेहतर शहर चाहिए: साइक्लिंग क्लब
मास्टर प्लान-2041 पर साइक्लिंग क्लब का विजन

देहरादून मास्टर प्लान-2041 में स्वास्थ्य और पर्यावरण को मिले प्राथमिकता: हरिसिमरन सिंह
सड़क चौड़ीकरण नहीं, लक्ष्य आधारित विकास, सार्वजनिक परिवहन और साइक्लिंग नेटवर्क पर हो फोकस
देहरादून। देहरादून साइक्लिंग क्लब ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) से मांग की है कि देहरादून मास्टर प्लान-2041 को अंतिम रूप देने से पहले जनसुनवाई में मिले सभी सुझावों और आपत्तियों को गंभीरता से शामिल किया जाए। क्लब का कहना है कि मास्टर प्लान सिर्फ भवन निर्माण और भूमि उपयोग तक सीमित न होकर शहर के स्वास्थ्य, पर्यावरण, यातायात, जल सुरक्षा और जीवन गुणवत्ता का दीर्घकालिक रोडमैप होना चाहिए।
क्लब के अध्यक्ष हरिसिमरन सिंह ने कहा कि मास्टर प्लान में सतत विकास और बेहतर परिवहन व्यवस्था की बात तो की गई है, लेकिन इसमें समयबद्ध लक्ष्य, मापनीय परिणाम और जवाबदेही का स्पष्ट अभाव है। उन्होंने कहा कि यूरोप के कई शहर अपने मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन, साइकिल उपयोग, हरित क्षेत्र और कार्बन उत्सर्जन जैसे मानकों के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करते हैं, जबकि देहरादून के प्रस्तावित प्लान में ऐसे ठोस प्रावधान नहीं दिखते।
क्लब ने सुझाव दिया कि वर्ष 2041 तक 30 से 40 प्रतिशत यात्राएं सार्वजनिक परिवहन से और 20 से 25 प्रतिशत यात्राएं साइकिल से कराने का लक्ष्य तय किया जाए। साथ ही 100 प्रतिशत सीवरेज ट्रीटमेंट, प्रत्येक नागरिक को 300 मीटर के भीतर पार्क की सुविधा और नए विकास क्षेत्रों में कम से कम 25 प्रतिशत किफायती आवास सुनिश्चित किए जाएं।
प्रेसवार्ता में कहा गया कि वर्तमान मास्टर प्लान में सड़क, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, पार्किंग, खेल मैदान, वायु गुणवत्ता, भूजल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई देती। अनियोजित विकास और लगातार पेड़ों की कटाई से देहरादून की हरियाली और प्राकृतिक पहचान पर संकट बढ़ रहा है।
देहरादून साइक्लिंग क्लब ने शहर में सुरक्षित और पृथक साइकिल ट्रैक, ग्रीन साइक्लिंग कॉरिडोर, सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम, स्कूल-कॉलेजों के लिए सुरक्षित साइकिल मार्ग और सरकारी कार्यालयों में साइकिल पार्किंग विकसित करने की मांग की। इसके अलावा वन क्षेत्रों में माउंटेन बाइक ट्रेल विकसित कर इको-टूरिज्म और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया।
क्लब का कहना है कि ट्रैफिक जाम का समाधान केवल सड़क चौड़ीकरण नहीं है। सार्वजनिक परिवहन को अधिक सस्ता, सुरक्षित और समयबद्ध बनाकर लोगों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इसके लिए बेहतर बस सेवा, समर्पित बस लेन, लास्ट माइल कनेक्टिविटी, पार्क-एंड-राइड सुविधा और स्मार्ट टिकटिंग व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
क्लब ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट, किफायती आवास, शहरी वन, रेन गार्डन, ग्रीन रूफ, ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, हीट एक्शन प्लान, बाढ़ प्रबंधन और जल संरक्षण को भी मास्टर प्लान में प्रमुखता देने की मांग की। साथ ही प्रत्येक वार्ड में न्यूनतम हरित क्षेत्र, वृक्ष संरक्षण नीति और नदी-नालों के किनारे हरित बफर विकसित करने की सिफारिश की।
देहरादून साइक्लिंग क्लब ने कहा कि भविष्य का शहर वाहनों के लिए नहीं बल्कि लोगों के लिए बनाया जाना चाहिए। यदि मास्टर प्लान में स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन, सक्रिय परिवहन और स्पष्ट लक्ष्य आधारित विकास को प्राथमिकता दी जाती है तो देहरादून देश की पहली साइक्लिंग-फ्रेंडली पर्वतीय राजधानी बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।



