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भारतीय ज्ञान प्रणाली को नई शिक्षा से जोड़ने की पहल

देवभूमि विवि में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर पांच दिवसीय एफडीपी का आगाज, विशेषज्ञों ने बताई प्राचीन ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एलाइड साइंस विभाग की ओर से भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) विषय पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Programme-FDP) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रख्यात मॉडरेटर एवं कवयित्री डॉ. प्राची काण्डवाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक और वैश्विक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता आधुनिक विश्व की एकमात्र ऐसी जीवित सभ्यता है, जिसने अपने अतीत से आज तक जीवंत संबंध बनाए रखे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन दर्शन का समृद्ध आधार भी प्रस्तुत करती है।

अपने व्याख्यान में डॉ. काण्डवाल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रमुख आधारों, चारों वेद, छह वेदांग तथा ब्रह्मांड संबंधी भारतीय चिंतन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन ग्रंथों में निहित ज्ञान आज भी शोध, शिक्षा और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर के रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. चिनप्पा भास्कर, विश्वविद्यालय की प्रति-कुलपति प्रो. ऋतिका मेहरा और प्रो. आर.के. त्रिपाठी, लॉ विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल दीक्षित, प्रबंधन विभाग के डीन प्रो. अश्वनी कुमार तथा कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शिखा भास्कर सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे।

एफडीपी के पहले दिन विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकों, शोधार्थियों और विषय विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता की। आयोजकों ने बताया कि पांच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान, संवाद और अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप विषय की गहन समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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