डिस्टेंस टेक्निकल डिग्री विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कहा– डिग्री रद्दीकरण के असर पर फैसला UGC करेगा

डिस्टेंस लर्निंग के जरिए प्राप्त तकनीकी डिग्रियों के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी डिग्री को रद्द करने के बाद उसके प्रभावों पर निर्णय लेने की विधिक प्राधिकृत संस्था यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ही है। कोर्ट ने कहा कि यह तय करना न्यायालय का कार्य नहीं है कि कोर्स रद्द होने से पहले पढ़ाई करने वाले छात्रों को डिग्री का लाभ मिलना चाहिए या नहीं।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने 9 फरवरी को UGC की अपील पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिन छात्रों ने न्यायालय के अंतरिम आदेश के आधार पर डिस्टेंस लर्निंग से तकनीकी कोर्स किया है, उनकी डिग्री पर कोर्स रद्द होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण से असहमति जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय UGC को ही लेना होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि डिग्री के स्वरूप और वैधता से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार कर निर्णय लेने की जिम्मेदारी नियामक संस्था की है।
यह आदेश उड़ीसा लिफ्ट इरिगेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम रबी शंकर पात्रो और अन्य (2018) में स्थापित सिद्धांतों के आधार पर पारित किया गया है। उस मामले में डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से इंजीनियरिंग डिग्री प्रदान की गई थी, जिसे बाद में इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि तकनीकी शाखाओं में डिस्टेंस लर्निंग की अनुमति नहीं थी।
पीठ ने 5 जुलाई 2023 को विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी कर संबंधित डिग्री के स्वरूप के बारे में जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित डिग्री तकनीकी शाखा से जुड़ी हुई है।
साथ ही, कोर्ट ने CMJ फाउंडेशन और अन्य बनाम मेघालय राज्य और अन्य (2024) में दिए गए अपने निर्णय का भी हवाला दिया। उस फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि गैर-कानूनी डिग्रियों को निरस्त करने और उसके प्रभावों पर विचार करने का अधिकार UGC को है।
इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अन्नामलाई विश्वविद्यालय उन छात्रों की सूची UGC को उपलब्ध कराए, जिन्होंने विवादित डिग्री प्राप्त की है। सूची प्राप्त होने के बाद UGC प्रत्येक मामले की समीक्षा कर उपयुक्त निर्णय लेगा।
यह फैसला देशभर में डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से तकनीकी डिग्री हासिल करने वाले हजारों छात्रों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब उनके भविष्य का अंतिम निर्णय UGC के स्तर पर तय होगा।




