एथेनॉल ब्लेंडिंग पर केंद्र सरकार की चुप्पी, पारदर्शिता पर उठे सवाल
पेट्रोल की कीमतों से जुड़ी जानकारी पर ‘कमर्शियल कॉन्फिडेंस’ का हवाला क्यों?

RTI में मांगी गई जानकारी देने से इनकार, देहरादून साइक्लिंग क्लब अध्यक्ष हरि सिमरन सिंह ने जताई नाराजगी, कहा मामले में अब दायर की जाएगी प्रथम अपील
देहरादून। पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं को लेकर पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा दिए गए जवाब ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।
देहरादून साइक्लिंग क्लब के अध्यक्ष हरि सिमरन सिंह ने आरोप लगाया कि एक ओर आम जनता लगातार महंगा पेट्रोल खरीदने को मजबूर है, वहीं दूसरी ओर एथेनॉल मिश्रण से जुड़े वास्तविक आर्थिक आंकड़े और तेल कंपनियों की वित्तीय व्यवस्था सार्वजनिक नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि RTI के माध्यम से एथेनॉल सप्लायर्स को वर्षवार दी गई सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन HPCL ने इसे “opinion/clarification” बताते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया।
RTI जवाब में कंपनी ने यह भी कहा कि मांगी गई कुछ जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है, जबकि कुछ सूचनाओं को RTI Act की धारा 8(1)(d) के तहत “commercial confidence” बताते हुए साझा करने से मना कर दिया गया। इस पर हरि सिमरन सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मामला सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम जनता की जेब से जुड़ा है, तब पारदर्शिता से बचना उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि एथेनॉल सप्लायर्स को किसी प्रकार की सब्सिडी या प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई है तो कंपनियों को स्पष्ट रूप से “शून्य” लिखकर जवाब देना चाहिए था। वहीं यदि जानकारी उपलब्ध नहीं है तो यह भी बड़ा प्रश्न है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की निगरानी किस प्रकार की जा रही है।
देहरादून साइक्लिंग क्लब के अध्यक्ष हरि सिमरन सिंह ने आरोप लगाया कि RTI कानून की धारा 8(1)(d) का इस्तेमाल कर सार्वजनिक महत्व की सूचनाओं को छिपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का सीधा असर देशभर में पेट्रोल की कीमतों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है, इसलिए इससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक हित में साझा की जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि मामले में अब प्रथम अपील दायर की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत तेल कंपनियों और सप्लायर्स के बीच किस प्रकार की आर्थिक व्यवस्था और भुगतान प्रणाली लागू है।




