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प्रेमनगर में भागवत महापुराण कथा का भव्य समापन: यदुवंश का विनाश, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष से भक्त हुए भावविभोर”

भव्य आरती और भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया प्रसाद ग्रहण

प्रेम नगर सनातन धर्म मंदिर में सात दिवसीय भागवत महापुराण कथा का भव्य समापन हुआ। कथा वाचक आचार्य प्रवीण नौटियाल ने भक्तों को यदुवंशियों का नाश, गांधारी एवं दुर्वासा ऋषि का श्राप, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के अद्भुत प्रसंग श्रवण कराए। व्यास जी ने कहा कि जिसके ऊपर भगवान की असीम कृपा होती है उसी को श्री भागवत महापुराण के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त होता है। जो व्यक्ति श्रद्धा प्रेम भाव से कथा का श्रवण करता है उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

व्यास जी ने श्रवण कराया कि महाभारत युद्ध के बाद गांधारी ने यदुवंशियों को श्राप दिया और गांधारी और दुर्वासा ऋषि के श्राप से यदुवंशियों का विनाश निश्चित हुआ। सात्यकि और कृतवर्मा के बीच हुए विवाद के कारण यदुवंशियों में आपसी युद्ध भड़क उठा, जिसमें श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न और मित्र सात्यकि समेत अधिकांश यदुवंशी मारे गए, केवल बब्रु और दारूक ही बचे।

कथा में यह भी सुनाया गया कि जब श्रीकृष्ण पीपल के नीचे ध्यानमग्न थे, तो शिकारी जरा ने उनके पैरों में तीर चला दिया। श्रीकृष्ण ने इसे अपने मनचाहे कार्य के रूप में स्वीकार किया और जरा को आश्वस्त किया।

साथ ही, भक्तों ने सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता के माध्यम से सच्ची मित्रता, सहयोग और समर्पण का संदेश प्राप्त किया। व्यास जी ने कहा कि भगवान का भजन करने वाला, जाप करने वाला कभी निर्धन नहीं हो सकता, सुदामा तो भगवान के मित्र थे, यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ। संतोष सबसे बड़ा धन है। सुदामा की मित्रता भगवान के साथ नि:स्वार्थ थी। उन्होंने कभी उनसे सुख, साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की, लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गए चावलों में भगवान श्रीकृष्ण से सारी हकीकत कह दी और प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सब कुछ प्रदान कर दिया।

उन्होंने कहा कि भगवान पर विश्वास और भरोसा मजबूत होना चाहिए। जिस प्रकार माता रुकमणी को अपने कृष्ण पर विश्वास था कि वह आएंगे और उनके मित्र सुदामा को आस्था थी कि मैं भगवान का ध्यान और मनन करता रहूंगा तो मेरे परिवार को वैभव प्राप्त होगा। ईश्वर पर आस्था रखना चाहिए जो भी भक्त ईश्वर पर आस्था और विश्वास करता है उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कथा में यह भी बताया गया कि परीक्षित को मोक्ष प्राप्त हुआ, जो धर्म और भक्ति का आदर्श प्रस्तुत करता है।

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कथा के उपरान्त कैंट विधायक श्रीमति सविता कपूर ने व्यास जी का आशीर्वाद लिया। मंदिर के प्रधान सुभाष माकिन, अवतार कृष्णा कौल, विनोद कुमार, मनोज बहल,  अर्चित डाबर, राजेश भाटिया टोनी, हरीश कोहली, संजय भाटिया, पुनीत सहगल, बलविंदर मैनी, भूषण भाटिया, विक्की खन्ना, जगदीश गिरोटी, सौरभ पांडे, पुलकित मैनी, फकीरचंद खेत्रपाल, जतिन तलवार, विपुल गोस्वामी, बॉबी भाटिया, गुलशन माकिन, रविन्द्र माकिन, नरेश भाटिया, अर्जुन कोहली, ओम प्रकाश, रवि भाटिया (मीडिया प्रभारी) के साथ ही महिला संकीर्तन मंडल की प्रधान शिवानी भाटिया, उप प्रधान पारुल बिश्नोई, कोषाध्यक्ष अनीता मैनी, पूनम सैनी, गीता साहनी, मधु भाटिया, बीनू खन्ना, पूनम माटा, रेनु भाटिया, सुषमा, सुनीता माकिन , शशि ओबेरॉय, बत्त्तो देवी, चंपा, रीना, अंजू सैनी, अशोक झा, उर्मिला चौधरी, सानवरी जी को सम्मानित किया गया। इनके अतिरिक्त अंजू बब्बर , सुदेश अरोरा, यशोदा, करुणा वर्मा, ज्योति भाटिया, सुदर्शना आहूजा, कमलेश ग्रोवर, गीता शर्मा,  संगीता भाटिया, कमलेश कनोजिया, बिंदु शर्मा, संतोष मिश्रा के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

कथा समापन के बाद मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, घी के दीपक जलाकर सामूहिक आरती और जयकारों का आयोजन हुआ। भक्तजन बांके बिहारी लाल के जयकारे लगाते हुए हर्षित दिखाई दिए। इसके बाद सभी भक्तों के लिए भंडारा आयोजित किया गया, जिसमें प्रसाद ग्रहण कर उन्होंने आनंद प्राप्त किया। मंदिर में उत्सव का माहौल अत्यंत हर्षोल्लासपूर्ण था और भक्तजन इस अवसर से अत्यंत प्रसन्न दिखे। मंदिर प्रधान और आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन भक्तों में आध्यात्मिक जागरूकता और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।

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