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पेट्रोल 100 पार, डीजल भी तैयार

पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर बढ़ोतरी, देहरादून में पेट्रोल 100.60 और डीजल 95.99 रुपये पहुंचा

चौथी बार बढ़े ईंधन के दाम, आम जनता और व्यापारियों पर बढ़ा महंगाई का दबाव

देहरादून। सोमवार को पेट्रोल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी कर आम नागरिकों को जोरदार झटका दिया है। लगातार चौथी बार हुई इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी देहरादून में पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।

नई दरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 2 रुपये 61 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद देहरादून में पेट्रोल 100 रुपये 60 पैसे प्रति लीटर और डीजल 96 रुपये प्रति लीटर हो गया है। बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और इसका असर अब बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

तेल कंपनियों की ओर से की गई इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वैश्विक तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को मुख्य कारण माना जा रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों से वाहन चालकों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित होने लगा है।

बाजार पर बढ़ेगा असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर बाजार पर पड़ने की आशंका है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिससे फल-सब्जियों, किराना, दूध, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि ईंधन के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो महंगाई और तेज हो सकती है।

देहरादून के व्यापार मंडल से जुड़े कारोबारियों के अनुसार पहले से ही बाजार में ग्राहकों की खरीदारी सीमित है और अब परिवहन खर्च बढ़ने से व्यापार पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। छोटे दुकानदारों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट चार्ज बढ़ने का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।

परिवहन और पर्यटन क्षेत्र भी प्रभावित

उत्तराखंड जैसे पर्यटन आधारित राज्य में ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पर्यटन कारोबार पर भी पड़ने लगा है। टैक्सी और बस संचालकों का कहना है कि लागत बढ़ने से किराया बढ़ाना मजबूरी बन सकता है। चारधाम यात्रा सीजन के दौरान यह बढ़ोतरी यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।

आम जनता में नाराजगी

लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर आम लोगों में नाराजगी है। वाहन चालकों का कहना है कि हर कुछ दिनों में बढ़ रहे दामों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। लोगों ने सरकार से ईंधन कीमतों पर नियंत्रण और राहत देने की मांग की है।

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