अब पैकेट के सामने दिखेगा सच : चीनी-नमक-वसा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल दीक्षित ने किया निर्णय का स्वागत
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चीनी-नमक-वसा की स्पष्ट चेतावनी अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट का FSSAI को सख्त निर्देश
देश में बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर चिंता जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को सभी पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के सामने (Front-of-Pack) स्पष्ट चेतावनी और पोषण संबंधी जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि जिन उत्पादों में चीनी, वसा और नमक (सोडियम) की मात्रा अधिक है, उन्हें पैकेट के सामने बड़े और स्पष्ट अक्षरों में दर्शाया जाए, ताकि उपभोक्ता खरीदते समय जागरूक निर्णय ले सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि खाद्य कंपनियों का व्यापारिक हित उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से ऊपर नहीं हो सकता। अदालत ने FSSAI को आवश्यक नियमों में संशोधन कर जल्द प्रभावी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि यदि नियामक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल दीक्षित ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में दी गई जानकारी आम उपभोक्ता के लिए पर्याप्त नहीं होती। उन्होंने कहा, “Front-of-Pack लेबलिंग से लोगों को तुरंत पता चलेगा कि उत्पाद में चीनी, नमक या वसा की मात्रा कितनी अधिक है। इससे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।”
गौरतलब है कि भारत में जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते सेवन को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट चेतावनी लेबलिंग से कंपनियों पर भी दबाव बनेगा कि वे अपने उत्पादों में हानिकारक तत्वों की मात्रा कम करें।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शिता और सुरक्षित खाद्य विकल्प मिल सकेंगे।



