बदरीनाथ दान प्रकरण : PA सस्पेंड, 15 दिन में खुलेगा पूरा सच
प्रथम दृष्टया आरोप सही, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित

उपदान-चढ़ावे में कथित गड़बड़ी पर कार्रवाई, बीकेटीसी और शासन दोनों सख्त
देहरादून/चमोली। श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बीच प्रशासन और मंदिर समिति ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत मिलने पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
बीकेटीसी के अनुसार संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद गठित जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना। समिति ने यह भी माना कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित कर्मचारी का पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर उन्हें निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता मिलेगा और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
दूसरी ओर, शासन ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल मंडल आयुक्त करेंगे, जबकि अन्य दो सदस्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होंगे। समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर 15 दिनों के भीतर शासन को अपनी रिपोर्ट और आवश्यक सिफारिशें सौंपेगी।
सरकार ने समिति को आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों और संबंधित विभागों का सहयोग लेने की भी अनुमति दी है। साथ ही मंदिरों में दान-चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए सुधारात्मक सुझाव देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
बीकेटीसी का कहना है कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।



