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सहकारिता से ही संभव है शांतिपूर्ण विश्व का निर्माण : प्रो. अनिल दीक्षित

देहरादून। वैश्विक स्तर पर शांति, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में सहकारिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में जब दुनिया अनेक तरह के संघर्षों और चुनौतियों से जूझ रही है, तब सहयोग और साझेदारी की भावना ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। यह बात देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के डीन एवं संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार दीक्षित ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, देहरादून द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कही।

अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, देहरादून के तत्वावधान में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सहकारिता को सामाजिक समरसता, आर्थिक सशक्तिकरण और विश्व शांति की मजबूत नींव बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।

मुख्य वक्ता देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के डीन एवं संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनेक प्रकार के संघर्षों और चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में सहकारिता की भावना ही समाजों और देशों के बीच विश्वास, सहयोग और शांति स्थापित कर सकती है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस की थीम “शांतिपूर्ण विश्व के लिए सहकारिता” (Cooperatives for a Peaceful World) निर्धारित की है। यह थीम सहकारी संस्थाओं द्वारा सामाजिक न्याय, समानता, एकजुटता और सतत विकास में दिए जा रहे योगदान को रेखांकित करती है।

रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के चेयरमैन डॉ. सुशील सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर प्रत्येक वर्ष जुलाई के प्रथम शनिवार को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सहकारी आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाना तथा लोगों को सहयोग एवं साझेदारी की भावना से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय भारत के विकास की आधारशिला है और सहकारिता समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।

वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार भी सहकारिता क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा “सहकार से समृद्ध भारत” के संकल्प के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को निरंतर मजबूत किया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम के अंत में सहकारिता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण में इसकी भागीदारी को और सशक्त बनाने का संकल्प लिया गया। गोष्ठी में हीरा पंवार, अशोक अग्रवाल, श्रीमती मीना देवी, सोनू शुक्ला, रजत कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

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