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अब मंच पर नहीं सुनाई देगी पंडवानी की अमर गाथा

पंडवानी की अमर स्वर साधिका तीजन बाई का निधन, लोककला जगत को अपूरणीय क्षति
प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का रविवार तड़के करीब तीन बजे रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह 69 वर्ष की थीं।
तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुति और विशिष्ट अभिनय शैली से पंडवानी लोकगायन को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर इस लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उनकी कला-साधना के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया।
उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अनेक नेताओं और सांस्कृतिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उनके निधन को भारतीय लोककला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर एम्स पहुंचकर तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
1956 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले (वर्तमान बालोद क्षेत्र) के एक साधारण परिवार में जन्मी तीजन बाई ने सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हुए पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने देश-विदेश में हजारों प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई और नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा बनीं।
तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। अपनी अद्वितीय कला-साधना और पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा।

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