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राम-भरत मिलन और राजतिलक ने बांधा समां, सजा श्रीराम का दिव्य दरबार

ज्योतिर्मठ में श्रीराम के राजतिलक के साथ भव्य रामलीला का समापन, भावुक हुए दर्शक

ज्योतिर्मठ। सीमांत नगर ज्योतिर्मठ में आयोजित दस दिवसीय रामलीला महायज्ञ का समापन सोमवार को भगवान श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक के साथ श्रद्धा और उत्साह के माहौल में हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।

राज्याभिषेक से पहले श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की आकर्षक झांकी निकाली गई, जिसमें भजन-कीर्तन के साथ कलाकारों को रामलीला मंच तक लाया गया। मंच पर पहुंचने के बाद भरत-राम मिलन का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके पश्चात गुरु वशिष्ठ द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीराम का विधिवत राजतिलक किया गया।

मंचन के दौरान मंत्री सुमंत द्वारा प्रजा का हाल सुनाने का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं, कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब देखने को मिला जब भगवान श्रीराम द्वारा हनुमान को विदाई स्वरूप माला अर्पित की गई। इस दौरान प्रस्तुत भक्ति गीत ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

दस दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में स्थानीय क्षेत्र के साथ-साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। रामलीला महायज्ञ के लिए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग भी किया। एक श्रद्धालु द्वारा गुमनाम रहकर 75 हजार रुपये की भेंट दिए जाने की चर्चा पूरे आयोजन में बनी रही। इसके अलावा तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना (एनटीपीसी) ने 51 हजार रुपये का सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम में देवपूजाई समिति, हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट, पाण्डुकेश्वर रामलीला कमेटी सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी सहयोग दिया। नगर पालिका, बीकेटीसी, विभिन्न राजनीतिक दलों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी आयोजन में पहुंचकर कलाकारों और समिति का उत्साहवर्धन किया।

समिति के अध्यक्ष भुवन चन्द्र उनियाल ने आयोजन की सफलता पर सभी सहयोगियों, प्रशासन, पुलिस और धर्मप्रेमी जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि ज्योतिर्मठ में रामलीला मंचन की परंपरा वर्षों पुरानी है, जो वर्ष 1972 से एक ही स्थान पर निरंतर आयोजित की जा रही है। यह आयोजन हर वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व सुखद यात्रा की कामना के साथ किया जाता है।

अंत में समिति ने मंचन से जुड़े कलाकारों, संगीतकारों, निर्देशकों और व्यवस्थापकों के योगदान को सराहते हुए उनका विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

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