आत्म-प्रेम, सकारात्मक संतुलन और विश्वास स्वस्थ जीवन के मजबूत स्तंभ : डॉ. अनिल दीक्षित
Self Care से बनेगा स्वस्थ समाज

अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस पर आयोजित गोष्ठी में विशेषज्ञों ने दी स्वास्थ्य साक्षरता, संतुलित जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
देहरादून। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तत्वावधान में मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्व-देखभाल दिवस के अवसर पर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, देहरादून की ओर से शुक्रवार को एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें स्व-देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि आत्म-प्रेम, सकारात्मक संतुलन और विश्वास स्वस्थ जीवन के मूल स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई की तिथि इस संदेश का प्रतीक है कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की देखभाल 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्व-देखभाल केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत बनाती है। जो लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहते हैं और नियमित देखभाल करते हैं, वे स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन स्व-देखभाल को उन उपायों के रूप में परिभाषित करता है, जिनके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने, बीमारियों की रोकथाम और उपचार के लिए स्वयं जिम्मेदारी निभाता है।
रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के चेयरमैन डॉ. सुशील सिंह ने कहा कि स्व-देखभाल की शुरुआत स्वास्थ्य साक्षरता से होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने रक्तचाप, बीएमआई सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी मानकों की जानकारी होनी चाहिए। साथ ही अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति को समझते हुए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी आवश्यक है।
महिला स्वास्थ्य पर अपने विचार रखते हुए मीना तिवारी ने कहा कि महिलाओं को पौष्टिक एवं संतुलित आहार अपनाने के साथ-साथ बढ़ते नशे और शराब सेवन जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने बच्चों के समय पर टीकाकरण, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचने तथा महिलाओं को अपनी सीमाएं तय करते हुए आवश्यकता पड़ने पर स्पष्ट रूप से ‘ना’ कहना सीखने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में मनोज कुमार, अरविंद वर्मा, रजत शर्मा, रोहन अग्रवाल, शुभांगी नेगी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।




