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लोकधुनों के अमर साधक: चंद्र सिंह राही को दूरदर्शन की श्रद्धांजलि

लोकसंगीत की परंपरा का उत्सव, राही परिवार की चार पीढ़ियाँ साथ

“लिख्वार-गितार”: राही की जयंती पर लोकसंस्कृति का भव्य मंचन

देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति के शिखर पुरुष चंद्र सिंह राही की जयंती के अवसर पर दूरदर्शन उत्तराखंड द्वारा “लिख्वार-गितार: अमर कलाकार” शीर्षक से एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम का प्रसारण 28 मार्च 2026 को किया जाएगा, जिसमें राही जी के अमूल्य योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया जाएगा।

इस विशेष कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें राही परिवार की चार पीढ़ियाँ एक साथ मंच पर नजर आईं। यह दृश्य उत्तराखंड की जीवंत लोक परंपरा और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बनकर उभरा। कार्यक्रम में कुमाऊँनी और गढ़वाली लोकगीतों के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं, वहीं राही जी के दुर्लभ और अप्रकाशित गीतों को भी मंच पर जीवंत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान एस. के. मीणा (क्लस्टर हेड) और अनिल कुमार भारती (कार्यक्रम प्रमुख) ने राही परिवार का सम्मान किया। उन्होंने राही जी की धर्मपत्नी सुधा देवी को शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदित किया।

इस कार्यक्रम का संयोजन और निर्माण नरेन्द्र सिंह रावत ने किया। मौके पर लोकसंगीत से जुड़े कई विशेषज्ञ, कलाकार और सांस्कृतिक प्रेमी भी मौजूद रहे।

गौरतलब है कि चंद्र सिंह राही ने अपने जीवन को उत्तराखंड की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और गाथाओं के संरक्षण के लिए समर्पित किया। आज उनका परिवार उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी तक अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहुंचा रहा है। राही परिवार की चार पीढ़ियों का एक मंच पर आना न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि परंपरा की मजबूत नींव ही भविष्य को सशक्त बनाती है।

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