‘महीना वसूली’ का भंडाफोड़, रिश्वत लेने पहुंचे आरटीओ इंस्पेक्टर को बनाया बंधक
परिवहन सचिव ने दिए तत्काल जांच के आदेश

हर्रावाला में ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का हंगामा, दुकान के अंदर बंद कर लगाए गंभीर आरोप
वाहनों से तय रेट पर महीना वसूली का आरोप, टेबल पर मिली नोटों की गड्डी
देहरादून में परिवहन विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। हर्रावाला क्षेत्र में सोमवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने एक आरटीओ इंस्पेक्टर को कथित रिश्वतखोरी के आरोप में दुकान के अंदर बंद कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।
वीडियो में दिखाई दे रहा अधिकारी खुद को बचाने की कोशिश करता नजर आता है। कभी वह कहता है कि वह सिर्फ पेशाब करने के लिए रुका था, तो कभी दावा करता है कि उसे जबरन बैठाकर रसमलाई खिलाई जा रही थी। लेकिन बाहर मौजूद लोगों का आरोप कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के मुताबिक, हर्रावाला क्षेत्र में लंबे समय से वाहनों से कथित “मासिक वसूली” का खेल चल रहा था। आरोप है कि सब इंस्पेक्टर शशिकांत तेंगोवाल अलग-अलग श्रेणी के वाहनों से तय रकम वसूलता था। सोमवार को भी वह कथित तौर पर पैसे लेने पहुंचा था, तभी कारोबारियों ने उसे पकड़ लिया और दुकान के अंदर बैठा दिया।
घटना की खबर फैलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने जमकर नारेबाजी की और परिवहन विभाग के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। दुकान के अंदर टेबल पर कागज में लिपटी नोटों की गड्डी रखी दिखाई दी, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।
कारोबारियों का आरोप है कि वाहनों के हिसाब से रिश्वत की रकम तय थी। उनके मुताबिक छोटी गाड़ियों से दो हजार रुपये प्रतिमाह, छह टायर वाहनों से आठ हजार रुपये, दस टायर वाहनों से दस हजार और बारह टायर वाहनों से बारह हजार रुपये तक लिए जाते थे। व्यापारियों का दावा है कि यह सिलसिला कई वर्षों से जारी था और लाखों रुपये की वसूली हो चुकी है।
मामले के दौरान लगाए गए एक पोस्टर ने पूरे विवाद को और हवा दे दी। पोस्टर पर लिखा था — “मैं देहरादून आरटीओ हूं, बिना पैसे गाड़ियां नहीं चलने दूंगा।” यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ तेजी से फैल गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो वायरल होने के बाद परिवहन विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन सचिव ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक आरोपी इंस्पेक्टर को फिलहाल प्रवर्तन कार्यों से हटाकर आरटीओ कार्यालय से अटैच कर दिया गया है, जबकि निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इस घटना ने परिवहन विभाग की कार्यशैली और कथित भ्रष्टाचार पर फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे आरोपों से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और आम लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन कितनी सख्त और पारदर्शी कार्रवाई करता है।




