50 IAS-IPS अधिकारियों की एक साथ जमीन खरीद और फिर करोड़ों का खेल?
एक ही दिन हुई रजिस्ट्री अब राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनी

पहले खरीदी जमीन, फिर आया ₹3200 करोड़ का बाईपास प्रोजेक्ट!
एक ही दिन खरीदी गई खेती की जमीन, फिर बदला नक्शा और बढ़ गई कीमतें 11 गुना
कुछ दस्तावेज…
कुछ सरकारी फैसले…
और फिर अचानक करोड़ों की जमीन अरबों की चर्चा में आ गई।
एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है।
दावा है कि कई बड़े अफसरों ने एक ही दिन खेती की जमीन खरीदी और कुछ महीनों बाद उसी इलाके में हजारों करोड़ का सरकारी प्रोजेक्ट मंजूर हो गया।
इसके बाद जमीन का इस्तेमाल बदल दिया गया और देखते ही देखते उसकी कीमतें आसमान छूने लगीं।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ संयोग था या फिर कहानी इसके पीछे कुछ और है?
लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जिस जमीन को पहले सामान्य कृषि भूमि माना जा रहा था, वही अचानक इतने बड़े रियल एस्टेट निवेश में कैसे बदल गई?
रिपोर्ट्स के मुताबिक जमीन खरीदने वालों में कई IAS और IPS अधिकारी शामिल थे। बताया जा रहा है कि सभी ने मिलकर एक ही दिन रजिस्ट्री करवाई थी।
इसके करीब 16 महीने बाद इलाके में ₹3,200 करोड़ के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई। फिर जमीन का लैंड यूज बदलकर “रेजिडेंशियल” कर दिया गया। इसके बाद जमीन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। जहां पहले जमीन करोड़ों में थी, वहीं अब उसकी कीमत कई गुना बढ़ चुकी बताई जा रही है।
पूरा मामला सामने आने के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “रियल एस्टेट इनसाइडर गेम” और “पावर कनेक्शन” जैसे नाम दे रहे हैं।
हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है। सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से भी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
MP Bypass Land Deal Controversy
एमपी बायपास लैंड डील विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य प्रदेश के भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित गुराड़ी घाट गांव में अप्रैल 2022 में करीब 50 IAS और IPS अधिकारियों ने लगभग 2.023 हेक्टेयर (करीब 5 एकड़) कृषि भूमि खरीदी थी। यह खरीद एक ही रजिस्ट्री दस्तावेज के जरिए की गई थी। उस समय जमीन की रजिस्ट्री कीमत करीब ₹5.5 करोड़ बताई गई, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹7.78 करोड़ था।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जमीन खरीदने वालों में मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा और तेलंगाना कैडर के अधिकारी भी शामिल थे। अधिकारियों ने इसे अपने IPR (Immovable Property Return) में “like-minded officers” का निवेश बताया था।
इसके करीब 16 महीने बाद अगस्त 2023 में ₹3,200 करोड़ के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। इसके लगभग 10 महीने बाद जून 2024 में जमीन का लैंड यूज कृषि से बदलकर रेजिडेंशियल कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार जमीन की कीमत करीब 11 गुना तक बढ़ गई। जहां पहले जमीन की कीमत लगभग ₹82 प्रति वर्गफुट बताई जा रही थी, वहीं बाद में यह बढ़कर ₹557 प्रति वर्गफुट तक पहुंच गई। वर्तमान बाजार दर ₹2500 से ₹3000 प्रति वर्गफुट तक होने का दावा किया जा रहा है, जिससे पूरी जमीन की अनुमानित वैल्यू ₹55 करोड़ से ₹65 करोड़ तक बताई जा रही है।
हालांकि अब तक इस मामले में किसी आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं हुई है और न ही किसी अधिकारी पर कोई आरोप साबित हुआ है। फिलहाल यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।




