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अब दो बार काटने वाले कुत्तों को यूपी में उम्रकैद!

जानें दुनिया में कहां लागू हैं ऐसे कानून

उत्तर प्रदेश सरकार ने आवारा कुत्तों से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए ऐतिहासिक और बहस छेड़ने वाला कदम उठाया है। अब राज्य में अगर कोई कुत्ता किसी व्यक्ति को दो बार काटता है, तो उसे हमेशा के लिए आश्रय-गृह में रखा जाएगा। यह फैसला एक ओर जहां सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पशु-अधिकार और मानवीय दृष्टिकोण पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

सड़क सुरक्षा में नया कानून

  1. उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। नगर निगमों और पंचायतों को शिकायतें मिल रही थीं कि लोग सड़कों पर सुरक्षित महसूस नहीं करते। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने नया कानून लागू किया।
  • पहली बार काटने पर – कुत्ते को 10 दिन निगरानी में रखा जाएगा।
  • इसके बाद नसबंदी, माइक्रोचिपिंग और टैगिंग अनिवार्य होगी।
  • फिर कुत्ते को उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।
  • लेकिन यदि दूसरी बार काटे, तो उसके लिए आजीवन आश्रय का प्रावधान होगा।

इस फैसले से उम्मीद है कि लोग बिना डर के सड़क पर निकल सकेंगे और साथ ही कुत्तों की आबादी का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा।

कुत्तों का नया सफर

नए कानून के तहत कुत्तों की यात्रा अब सामान्य पकड़-छोड़ प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी।

1. पकड़े जाने के बाद 10 दिन की मेडिकल निगरानी

2. नसबंदी और टीकाकरण

3. माइक्रोचिप और टैगिंग ताकि पहचान स्पष्ट हो

4. पहली गलती पर रिहाई, लेकिन

5. दूसरी गलती पर स्थायी आश्रय

यह प्रक्रिया दिखाती है कि सरकार कुत्तों को खत्म करने की बजाय उन्हें संभालने और ट्रैक करने की नीति अपना रही है।

दुनिया से तुलना

यूपी का यह कदम अकेला नहीं है। कई देशों ने पहले ही सख्त कानून बना रखे हैं:

  • तुर्की: नगरपालिकाओं को आदेश कि आवारा कुत्तों को पकड़कर आश्रय में रखा जाए और नसबंदी की जाए।
  • रोमानिया: यहां आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखा जाता है और अगर कोई उन्हें अपनाता नहीं तो उन्हें मारने तक की अनुमति है।
  • अमेरिका (फ्लोरिडा): पशु-क्रूरता और खतरनाक कुत्तों पर बेहद सख्त कानून, कई मामलों में कुत्तों को euthanasia तक दी जाती है।
  • स्विट्ज़रलैंड: कुत्तों को सड़क पर छोड़ना अपराध, इसके लिए तीन साल तक की जेल हो सकती है।
  • नीदरलैंड्स: ‘नसबंदी, टीकाकरण और वापसी’ की नीति ने वहां आवारा कुत्तों की संख्या लगभग खत्म कर दी है।

विशेषज्ञों की राय और विवाद

पशु-अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से कुत्तों को सज़ा जैसा महसूस होगा, जबकि उनकी गलती इंसानों की लापरवाही या पालतू बनाने के बाद छोड़ देने की वजह से होती है।

दूसरी ओर डॉक्टरों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि जन स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा को देखते हुए यह कदम व्यावहारिक है।

“अगर इंसानों की सुरक्षा और कुत्तों का संतुलित प्रबंधन एक साथ किया जाए तो यही सही रास्ता है।”

क्यों ज़रूरी था यह कदम?

यूपी में बीते कुछ वर्षों में कुत्तों के काटने के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है।

कई घटनाओं में बच्चे और बुज़ुर्ग गंभीर रूप से घायल हुए। लोगों में भय का माहौल बन गया था। नगर निगमों के पास कोई स्पष्ट और सख्त नीति नहीं थी। नया कानून इन सभी समस्याओं को संबोधित करने की कोशिश करता है।

 

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