
विकासनगर : जौनसार-बावर क्षेत्र में दीपावली का उल्लास इन दिनों पूरे जोश के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के तीसरे दिन चिल्हाड़ गांव में पारंपरिक बिरुड़ी उत्सव का आयोजन हुआ, जहां स्थानीय महिलाओं ने सामूहिक लोकनृत्य किया और एक-दूसरे को अखरोट एवं धान की चिवड़ा मूड़ी भेंट कर दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
ढोल-दमाऊ की थाप पर महिलाओं ने पारंपरिक तांदी नृत्य की प्रस्तुति दी, जिससे पंचायती आंगन लोकधुनों से गूंज उठा। बिरुड़ी पर्व सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर एकजुटता का संदेश दिया।
प्रदूषण रहित दिवाली की मिसाल
जौनसार-बावर क्षेत्र के लोग दीपावली पर आतिशबाजी से दूरी बनाकर पर्यावरण के अनुकूल और प्रदूषण रहित तरीके से त्योहार मनाते हैं। इस परंपरा को समाज में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में दीपावली का पारंपरिक जश्न जारी है।
सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
जौनसारी जनजाति अपनी प्राचीन परंपराओं और लोक संस्कृति के अनुसार सभी त्योहार मनाती है। बिरुड़ी पर्व न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है बल्कि यह सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक मूल्यों को सहेजने का पर्व भी है।




