क्राइम सीन से कोर्ट तक… लॉ के छात्रों ने सीखी फॉरेंसिक जांच की बारीकियां

माया देवी यूनिवर्सिटी में क्राइम सीन तैयार कर सात एग्जीबिट के माध्यम से समझाई गई न्यायिक विज्ञान की उपयोगिता
देहरादून। आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में फॉरेंसिक विज्ञान की बढ़ती अहमियत को देखते हुए माया देवी यूनिवर्सिटी में लॉ के छात्र-छात्राओं के लिए विशेष प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक तकनीकों के माध्यम से अपराधों की जांच करने, घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और न्यायालय में उनकी उपयोगिता को समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक विभाग एवं नर्सिंग विभाग के सहयोग से स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज के विद्यार्थियों को न्यायिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी विषय विशेषज्ञों ने दी। इस दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी आपराधिक मामले की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और किस प्रकार घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य अपराध की कड़ियों को जोड़ने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल ऑफ लाइफ एंड एप्लाइड साइंस के विषय विशेषज्ञ साहिल कपूर, कंप्यूटर साइंस विभाग के अनूप कुमार, नर्सिंग विभाग की डीन डॉ. क्रिस्टिना जॉर्ज, कृतिका और वंदना पटेल के साथ विधि विभाग के सहायक प्रोफेसर कुमार मयंक, वंदना अरोड़ा और पूनम सिंह के सहयोग से एक काल्पनिक क्राइम सीन तैयार किया गया। इसके माध्यम से सात अलग-अलग एग्जीबिट प्रदर्शित किए गए। विद्यार्थियों ने इन एग्जीबिट के जरिए फॉरेंसिक साक्ष्यों की पहचान, उन्हें एकत्र करने और जांच प्रक्रिया में सावधानियों को प्रयोगात्मक तरीके से सीखा।
विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में फॉरेंसिक साक्ष्यों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। वैज्ञानिक तरीके से जुटाए गए साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए माया देवी यूनिवर्सिटी में विधि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बनाने के लिए इस तरह के नए शिक्षण तरीकों को अपनाया जा रहा है।




