बड़ा हादसा: बद्रीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराकर क्रैश, छह लोगों की मौत

जोशीमठ के छई गांव के पास मिला मलबा और सभी छह शव बरामद, दिल्ली निवासी पायलट हिमांशु सबरवाल समेत पांचों यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे
देहरादून। चमोली जिले में शुक्रवार को बद्रीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर भीषण हादसे का शिकार हो गया। ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के पास छई गांव के समीप हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। दुर्घटनास्थल से सभी छह शव बरामद कर लिए गए हैं। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने भी छह लोगों की मौत और शव बरामद होने की पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर (कॉल साइन VT-HCX) शुक्रवार दोपहर करीब 1:14 बजे बद्रीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। ज्योतिर्मठ घाटी के ऊपर उड़ान के दौरान अचानक हेलीकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इसके साथ ही उसका ट्रैकिंग सिस्टम भी काम करना बंद कर गया। शुरुआत में हेलीकॉप्टर के लापता होने की सूचना मिली थी, लेकिन कुछ ही देर बाद छई गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में धुआं उठता दिखाई देने और मलबा मिलने से दुर्घटना की पुष्टि हो गई।
हेलीकॉप्टर में दिल्ली निवासी पायलट कैप्टन हिमांशु सबरवाल के अलावा पांच यात्री सवार थे। यात्रियों की पहचान प्रतापा, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नागराजा के रूप में सामने आई है। सभी पांच यात्री कर्नाटक के निवासी बताए गए हैं। हादसे में किसी के भी जीवित बचने की जानकारी नहीं है।
खराब मौसम के बीच हुआ हादसा
घटना के समय जोशीमठ और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश, बर्फबारी और घने बादलों के कारण दृश्यता बेहद कम थी। मौसम खराब होने के बावजूद हेलीकॉप्टर की उड़ान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद भारतीय सेना, जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में अभियान चलाकर सभी छह शव बरामद किए गए।
ट्रांस भारत एविएशन के पूरे बेड़े पर रोक
हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) ने एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े के संचालन पर रोक लगा दी है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और पूरे घटनाक्रम की निगरानी की।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और खराब मौसम में उड़ानों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।



