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दिल से साबित करो कि जिंदा हो, सांस लेना कोई सबूत नहीं : डॉ. मुकुल शर्मा

देवभूमि यूनिवर्सिटी में दीक्षारम्भ-2026 के दौरान विधि छात्रों को सफलता और जीवन का मंत्र

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में नए दाखिला लेने वाले विधि विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारम्भ-2026 के पांचवें दिन छात्रों को पढ़ाई के साथ जीवन में संतुलन, लक्ष्य और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. मुकुल शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन केवल सांस लेने का नाम नहीं है, बल्कि उसे उद्देश्य और संवेदनाओं के साथ जीना ही वास्तविक जीवन है।

डॉ. मुकुल शर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “दिल से साबित करो कि जिंदा हो, सांस लेना कोई सबूत नहीं।” उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन का लक्ष्य स्पष्ट रूप से तय करना चाहिए और लक्ष्य से भटकाने वाले विचारों को अपने मन से दूर रखना चाहिए। उनके मुताबिक सफलता के लिए एकाग्रता जरूरी है और शब्दों व बुद्धि के माध्यम से दुनिया को प्रभावित किया जा सकता है, लेकिन दिल जीतने के लिए संवेदनाएं ही काम आती हैं।

उन्होंने छात्रों को जीवन में व्यवहार और रिश्तों का महत्व समझाते हुए कहा कि घर से बाहर दिमाग लेकर निकलें, क्योंकि दुनिया एक बाजार है, लेकिन घर के भीतर दिल लेकर जाएं, क्योंकि वहां परिवार है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने करियर के साथ मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करने का आह्वान किया।

विधि संकाय के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने विद्यार्थियों को भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ते हुए कहा कि गीता का ज्ञान व्यक्ति के दिल और दिमाग दोनों को खोलने की क्षमता रखता है। इसके लिए जरूरी है कि गीता को केवल चर्चा का विषय न बनाया जाए, बल्कि उसे पढ़ा और समझा जाए। उन्होंने कहा, “पढ़ाई में मन नहीं लगता, बल्कि मन लगाया जाता है।” उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेहनत और संकल्प के साथ वे ऊंची उड़ान भर सकते हैं और दुनिया में अपनी पहचान बना सकते हैं।

दीक्षारम्भ कार्यक्रम का उद्देश्य नए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, विधि शिक्षा की संभावनाओं और सफल करियर के लिए जरूरी दृष्टिकोण से परिचित कराना है। कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव त्यागी ने भी विद्यार्थियों को सफलता के विभिन्न सूत्र बताए।

कार्यक्रम का संचालन सुश्री आकांक्षा बिष्ट ने किया, जबकि कार्यक्रम की परिकल्पना सुश्री नीलम सिंह ने तैयार की। इस अवसर पर डॉ. विनोद जोशी, हिमांशु जखमोला, राजन हांडा, सुश्री शिवांगी पाठक, सुश्री इस्माईल गोयल सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।

 

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