नई उम्मीदें, नए सपने और नई शुरुआत… दीक्षारम्भ में नए विधि छात्रों का भव्य स्वागत

देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के लॉ विभाग में नए सत्र का शुभारंभ, विशेषज्ञों ने छात्रों को शिक्षा, संस्कार और चरित्र निर्माण का दिया संदेश
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ पर दीक्षारम्भ 2026 कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. के. त्रिपाठी, रिसोर्स पर्सन प्रो. (डॉ.) नवनीत कुमार शुक्ला, स्कूल ऑफ लॉ के संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार दीक्षित तथा विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव त्यागी सहित शिक्षकों और बड़ी संख्या में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. के. त्रिपाठी ने कहा कि एक अच्छे छात्र का पहला गुण जिज्ञासु होना है। जिज्ञासा ही व्यक्ति को नई चीजें सीखने, समझने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी प्रश्न पूछने से नहीं हिचकिचाते और हर विषय को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, वही भविष्य में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करते हैं। विद्यार्थियों को सीखने की निरंतर प्रवृत्ति बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि यही गुण उन्हें सफल और जिम्मेदार नागरिक बनाता है।
रिसोर्स पर्सन प्रो. (डॉ.) नवनीत कुमार शुक्ला ने विद्यार्थियों से कहा कि छात्र जीवन का सबसे बड़ा धर्म शिक्षा ग्रहण करना है। शिक्षा ही व्यक्ति को ज्ञान, सम्मान और समाज में पहचान दिलाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, समय का सदुपयोग करने तथा अनुशासित जीवन अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अनुशासन और निरंतर परिश्रम के बल पर ही विद्यार्थी अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर सकते हैं और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
स्कूल ऑफ लॉ के संकायाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार दीक्षित ने दीक्षारम्भ कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य नए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, नियमों, संस्कृति और मूल्यों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि “अनुशासन के बिना लक्ष्य केवल इच्छाएं बनकर रह जाते हैं।” इसलिए विद्यार्थियों को शुरुआत से ही अनुशासन, समयबद्धता और जिम्मेदारी को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव त्यागी ने कहा कि दीक्षारम्भ कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शैक्षणिक जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय मूल्य, करुणा, समानता, नैतिकता और चरित्र निर्माण की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल परिसर और अन्य सुविधाओं से परिचित कराया गया। साथ ही उन्हें पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, विश्वविद्यालय के नियमों और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर लॉ फैकल्टी की सुश्री स्माइल गोयल, हिमांशु जखमोला, डॉ. विनोद जोशी, लाइब्रेरियन मीनाक्षी देवी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री स्माइल गोयल ने किया, जबकि अंत में हिमांशु जखमोला ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।




