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हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने हटाई बड़ी कानूनी अड़चन

नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्टिंग का रास्ता साफ

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 2024 का आदेश, 8 हफ्ते में होगी ज़मीन ट्रांसफर

नई दिल्ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा हल्द्वानी के गोलापार क्षेत्र में हाईकोर्ट की नई इमारत के लिए दी गई वैकल्पिक भूमि के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों का फैसला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि हल्द्वानी में हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के लिए आवंटित भूमि का कब्जा “जैसी है, जहां है” (As Is, Where Is) के आधार पर छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट को सौंपा जाए। साथ ही राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर भूमि हस्तांतरण संबंधी अधिसूचना जारी करने का भी आदेश दिया गया।

सुनवाई के दौरान जब अदालत को बताया गया कि संबंधित भूमि पर कुछ पेड़ मौजूद हैं, जिन्हें हटाने की आवश्यकता पड़ सकती है, तो चीफ जस्टिस ने कहा कि भूमि का कब्जा पेड़ों सहित ही हाईकोर्ट को सौंपा जा सकता है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इस तरह के प्रशासनिक मामलों में हाईकोर्ट को न्यायिक आदेश पारित नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विषयों का समाधान राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन के बीच आपसी समन्वय से होना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के मामलों का निर्णय न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से नहीं किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का विवादित आदेश रद्द कर दिया गया।

यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर अपील के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। बार एसोसिएशन ने 8 मई 2024 को पारित उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गोलापार की 26 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र वन भूमि होने और पेड़ों की कटाई की आशंका का हवाला देते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने तब मुख्य सचिव को एक महीने के भीतर अधिक उपयुक्त भूमि तलाशने का निर्देश दिया था।

अपने 2024 के आदेश में हाईकोर्ट ने नैनीताल से कोर्ट को स्थानांतरित करने की आवश्यकता भी बताई थी। अदालत ने ट्रैफिक जाम, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी, कमजोर कनेक्टिविटी, बढ़ती आवास लागत, वकीलों के रहने की समस्याओं और दूर-दराज़ जिलों से आने वाले वादकारियों की कठिनाइयों जैसे कारणों का उल्लेख किया था। साथ ही वकीलों और आम जनता से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुझाव लेने तथा पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए थे।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में ही सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था। अब अंतिम फैसला आने के बाद हल्द्वानी में उत्तराखंड हाईकोर्ट की नई इमारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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