
कोविड में विवाहिता बड़ी बेटी की मौत, पति के निधन के बाद आर्थिक संकट, आरटीई से नातिन का दाखिला और योजना से फीस जमा
देहरादून। जिले में प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली का एक मार्मिक उदाहरण सामने आया है, जहां जिलाधिकारी ने विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही विधवा शमा परवीन को न केवल आर्थिक राहत दिलाई, बल्कि उनके परिवार की शिक्षा से जुड़ी उम्मीदों को भी फिर से जीवित किया।
शमा परवीन के परिवार पर बीते कुछ वर्षों में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पहले साल 2014 में उनके पति का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इसी बीच कोविड काल में 2020 में उनकी बड़ी बेटी की भी मृत्यु हो गई, जिससे परिवार पूरी तरह टूट गया और आर्थिक संकट गहराता चला गया।
इन्हीं परिस्थितियों में वे बैंक ऋण और बच्चों की पढ़ाई जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं। मामले की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने त्वरित हस्तक्षेप करते हुए संबंधित विभागों और बैंक से समन्वय स्थापित किया।
जिलाधिकारी के प्रयासों से बैंक ऋण को वन टाइम सेटलमेंट (OTS) के तहत समाप्त कराया गया और एनओसी जारी कराई गई, जिससे शमा परवीन को बड़ी राहत मिली।
वहीं, उनकी छोटी बेटी की शिक्षा को “नंदा-सुनंदा योजना” के अंतर्गत पुनर्जीवित किया गया। इसके तहत एक वर्ष की 27 हजार रुपये की स्कूल फीस जमा कराई गई, जिससे उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकी।
इसके अलावा, 5 वर्षीय नातिन आयरा के आरटीई के तहत दाखिले में आ रही आय प्रमाण पत्र की बाधा को मौके पर ही दूर कर दिया गया। आवश्यक प्रमाण पत्र जारी कराते हुए उसका नजदीकी निजी विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन जरूरतमंद और असहाय नागरिकों की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर त्वरित सहायता प्रदान की जाएगी।
यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का उदाहरण है, जो यह दिखाती है कि समय पर उठाए गए कदम किसी जरूरतमंद परिवार के जीवन में नई उम्मीद जगा सकते हैं।




