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दून विश्वविद्यालय में सजा रंगमंच का महाकुंभ, प्रस्तुतियों ने छोड़ी गहरी छाप

पाँच दिनों तक गूंजा नाट्य उत्सव

विश्व रंगमंच दिवस पर ‘तुगलक’ से ‘सावित्रीबाई फुले’ तक यादगार प्रस्तुतियाँ, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

देहरादून। दून विश्वविद्यालय के रंगमंच एवं लोक प्रदर्शन कला विभाग और दून घाटी रंगमंच, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) के उपलक्ष्य में 27 से 31 मार्च 2026 तक आयोजित पाँच दिवसीय नाट्य समारोह ने शहर के सांस्कृतिक परिदृश्य को जीवंत कर दिया। विविध विषयों पर आधारित सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि गहन चिंतन के लिए भी प्रेरित किया।

नाट्य समारोह का शुभारंभ प्रख्यात नाटककार गिरीश कर्नाड के चर्चित नाटक ‘तुगलक’ के मंचन से हुआ। बृजेश नारायण के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने अपने प्रभावशाली संवाद और दमदार अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा।

द्वितीय दिवस पर बादल सरकार लिखित ‘पगला घोड़ा’ का मंचन मिताली पुनेठा के निर्देशन में किया गया। यह प्रस्तुति मानव मन के अधूरे प्रेम, भय और जीवन के जटिल निर्णयों को मार्मिक रूप में सामने लाती है, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

तीसरे दिन बादल सरकार के ही प्रसिद्ध नाटक ‘बाकी इतिहास’ का मंचन हुआ। बृजेश नारायण के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने अपराधबोध और अस्तित्व से जुड़े सवालों को प्रभावी ढंग से उकेरा।

चतुर्थ दिवस पर विश्वविद्यालय के छात्रों ने हरिशंकर परसाई लिखित व्यंग्य नाटक ‘राजपुर रोड का रोमियो’ का मंचन किया। डॉ. कैलाश कंडवाल के निर्देशन में यह प्रस्तुति सामाजिक पाखंड और दिखावे पर तीखा व्यंग्य करती नजर आई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

समारोह के अंतिम दिन ‘सावित्रीबाई फुले’ नाटक का मंचन हुआ, जिसका निर्देशन डॉ. अजीत पंवार ने किया। इस नाटक में सावित्रीबाई फुले के संघर्ष और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को जीवंत किया गया। विशेष रूप से ज्योतिराव फुले के साथ उनके भावनात्मक संवाद दर्शकों के दिल को छू गए।

समापन अवसर पर कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कलाकारों, आयोजकों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन विश्वविद्यालय में सृजनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम में प्रो. सुरेखा डंगवाल, दुर्गेश डिमरी, प्रो. एच.सी. पुरोहित, प्रो. हर्ष डोभाल, प्रो. आर.पी. ममगाई, डॉ. कैलाश कंडवाल, श्रीश डोभाल और डॉ. चेतना पोखरियाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में डॉ. अजीत पंवार, डॉ. कैलाश कंडवाल और बृजेश नारायण का विशेष योगदान रहा।

 

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