
टिहरी/गजा। उत्तराखंड के बहुचर्चित गुमलागांव तिहरे हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘विरलतम श्रेणी’ (रेयर ऑफ द रेयरेस्ट) में रखते हुए कठोरतम दंड दिया। साथ ही आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
2014 में हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
मामला 13 दिसंबर 2014 का है। गजा तहसील के गुमलागांव निवासी राम सिंह पंवार ने नायब तहसीलदार को तहरीर देकर बताया था कि उसके बेटे संजय सिंह ने मामूली विवाद के बाद अपनी मां मीना देवी (58), भाई सुरेंद्र सिंह (34) और गर्भवती भाभी कांता देवी (25) की तलवार से निर्मम हत्या कर दी। कांता देवी 12 सप्ताह की गर्भवती थीं और अत्यधिक रक्तस्राव से गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो गई थी।
तहरीर के आधार पर राजस्व पुलिस चौकी क्वीली में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने घटनास्थल से तलवार बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 201 और 316 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया। 10 फरवरी 2015 को मामला सेशन कोर्ट को सौंपा गया।
16 गवाह और ठोस साक्ष्य
टिहरी जिला न्यायालय में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बेणी माधव शाह ने अभियोजन पक्ष की ओर से 16 गवाहों और कई दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपराध की क्रूरता और परिस्थितियों को देखते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत गंभीर बताया और मृत्युदंड का फैसला सुनाया।
डांट से भड़का, घंटे भर में उजाड़ दिया परिवार
अभियोजन के अनुसार घटना वाले दिन सुबह बड़े भाई सुरेंद्र सिंह ने संजय को कामकाज को लेकर डांटा था। इसी बात से नाराज होकर वह आग-बबूला हो गया। उसने घर में रखी तलवार को धार दी और पहले जंगल में बकरी चरा रही गर्भवती भाभी कांता देवी की हत्या कर दी। इसके बाद घर लौट रहे भाई पर पीछे से हमला कर उसकी जान ले ली।
मां मीना देवी जब बड़े बेटे की हत्या की खबर सुनकर मौके की ओर दौड़ीं तो आरोपी ने उन्हें भी नहीं बख्शा। इस तरह करीब एक घंटे के भीतर उसने तीन हत्याएं कर दीं।
पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर किया गिरफ्तार
तीनों हत्याओं के बाद आरोपी पिता की लाइसेंसी बंदूक और तलवार लेकर कमरे में बंद हो गया था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। आरोपी लगातार गोली मारने की धमकी देता रहा। काफी मशक्कत के बाद रात में पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर उसे काबू में किया।
पिता की तहरीर, सदमे में मौत
घटना के बाद पिता राम सिंह ने ही अपने बेटे के खिलाफ तहरीर दी थी। हालांकि वारदात के करीब दो माह बाद सदमे में उनकी भी मृत्यु हो गई। सात वर्ष तक चले मुकदमे के बाद अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।




