नौकरी छोड़ी, सपना चुना और बन गईं टॉपर: बिनीता रावत की प्रेरक कहानी

गाँव की बेटी ने रचा इतिहास, UKPSC शिक्षा अधिकारी परीक्षा में हासिल किया पहला स्थान
देहरादून। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की शिक्षा अधिकारी परीक्षा 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त कर बिनीता रावत ने प्रदेश का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल की। उनकी सफलता आज ग्रामीण क्षेत्रों की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखती हैं।
10 सितंबर 1995 को जन्मी बिनीता रावत ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद भोपाल स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन से बीएससी-बीएड तथा बेंगलुरु के ज्योति निवास कॉलेज से रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य भी किया, लेकिन प्रशासनिक सेवा में योगदान देने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का कठिन रास्ता चुना।
बिनीता बताती हैं कि इस सफर में उनके माता-पिता का सहयोग सबसे बड़ी ताकत रहा। उनका कहना है कि परिवार के विश्वास और प्रोत्साहन ने हर कठिन समय में उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
सुनियोजित रणनीति बनी सफलता की कुंजी
परीक्षा की तैयारी के दौरान बिनीता ने नियमित अध्ययन, उत्तर लेखन अभ्यास, पुनरावृत्ति और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने सामान्य अध्ययन, हिन्दी और निबंध विषयों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया और छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर तैयारी को व्यवस्थित रखा।
उनका मानना है कि सफलता का मूल मंत्र है— पढ़ना, समझना, विश्लेषण करना और लगातार पुनरावृत्ति करना।
पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य का भी रखा ध्यान
कई प्रतियोगी छात्र तैयारी के दौरान अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बिनीता ने शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। उन्हें साइकिलिंग, बैडमिंटन और खाना बनाने का शौक है। वे दून साइक्लिंग क्लब से भी जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि मानसिक थकान होने पर साइकिलिंग या पैदल चलना उन्हें नई ऊर्जा देता था।
इंटरव्यू में पूछे गए विविध विषयों के प्रश्न
6 अप्रैल 2026 को हुए साक्षात्कार में शिक्षा, पर्यावरण, प्रशासनिक नैतिकता, समसामयिक घटनाओं और उत्तराखंड से जुड़े कई सवाल पूछे गए। लगभग 30 मिनट तक चले इंटरव्यू में बिनीता ने आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रखे।
उन्होंने सिविल सेवा को जनसेवा का प्रभावी माध्यम बताया और कहा कि एक अधिकारी के लिए अनुशासन, ईमानदारी, संवेदनशीलता और निर्णय क्षमता बेहद जरूरी गुण हैं। इंटरव्यू बोर्ड ने उनसे पर्यावरण, शिक्षा व्यवस्था, आयुष्मान भारत योजना, ग्रामीण विकास, प्रदूषण, संविधान संशोधन और प्रशासनिक नैतिकता जैसे विषयों पर भी सवाल किए।
भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बताया महत्वपूर्ण
बिनीता का मानना है कि केवल बौद्धिक क्षमता ही नहीं, बल्कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी एक सफल प्रशासक की पहचान होती है। उनके अनुसार जो व्यक्ति स्वयं की और दूसरों की भावनाओं को समझकर संतुलित निर्णय ले सके, वही समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकता है।
युवाओं और बेटियों को दिया संदेश
अपनी सफलता का श्रेय निरंतर मेहनत और धैर्य को देते हुए बिनीता ने युवाओं से कहा कि किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों से अपील की कि वे परिस्थितियों से घबराए बिना अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा, “यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उत्तराखंड की हर बेटी में नेतृत्व और प्रशासनिक सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की क्षमता है।”
बिनीता रावत की उपलब्धि आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।



