E-20 पेट्रोल नीति पर आम आदमी पार्टी का हमला, कहा- ‘जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ’

डिजिटल टाउनहॉल में 7 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा, केंद्र से E-10 विकल्प जारी रखने और पेट्रोल 84 रुपये प्रति लीटर करने की मांग
देहरादून। आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित ई-20 पेट्रोल नीति का विरोध करते हुए इसे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला फैसला बताया है। पार्टी का दावा है कि ई-20 पेट्रोल नीति के विरोध में आयोजित नेशनल डिजिटल टाउनहॉल रैली में देशभर से 7 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद जैन ने कहा कि देश के लगभग 80 से 90 प्रतिशत नागरिकों के पास वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहन हैं, जो ई-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किए गए हैं। ऐसे में इस नीति को लागू करना करोड़ों वाहन मालिकों पर एकतरफा फैसला थोपने जैसा है।
उन्होंने कहा कि इस नीति से इथेनॉल उद्योग और उससे जुड़े क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार ई-20 पेट्रोल के उपयोग से वाहनों की माइलेज घटने, इंजन और फ्यूल लाइन समेत अन्य पुर्जों के जल्दी खराब होने, रखरखाव व मरम्मत का खर्च बढ़ने, बीमा दावों को लेकर विवाद पैदा होने तथा पुराने वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
शरद जैन ने कहा कि दुनिया के केवल कुछ देशों ने ही ई-20 ईंधन को व्यापक स्तर पर अपनाया है। कई देशों ने पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव और कृषि संसाधनों पर बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए इसे सीमित रखा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ई-20 लागू करना चाहती है तो उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की कि फिलहाल इथेनॉल मिश्रण को अधिकतम ई-10 तक सीमित रखा जाए। साथ ही पेट्रोल पंपों पर ई-10 और ई-20 दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, पुराने वाहनों के लिए निःशुल्क तकनीकी संशोधन या पर्याप्त सब्सिडी दी जाए, कम माइलेज और अन्य आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए, वाहन मालिकों को कन्वर्जन सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए, बीमा दावों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा पेट्रोल की कीमत 84 रुपये प्रति लीटर रखी जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना पर्याप्त जनसंवाद के नीतियां लागू कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शुरू से ही इस नीति का विरोध कर रही है और देशभर के नागरिक भी इसके खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।
शरद जैन ने कहा कि उत्तराखंड की जनता भी जनहित से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से देख रही है और आगामी विधानसभा चुनाव में अपने मत के माध्यम से उचित निर्णय देगी।




