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कूड़ा मुक्त देहरादून या आश्वासन मुक्त अभियान?

नेशविल्ला रोड पर फिर जमा हुई गंदगी
देहरादून। कूड़ा मुक्त अभियान के तहत जिन कूड़ा घरों को “इतिहास” बना दिया गया था, वे अब दोबारा “वर्तमान” बनने लगे हैं। नेशविल्ला रोड पर करीब 60 वर्षों से सड़क किनारे बने कूड़ा घर को बंद कर घर-घर कूड़ा उठाने की व्यवस्था शुरू की गई थी। शहर ने राहत की सांस ली, लेकिन वह सांस ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई।
कुछ ही समय बाद उसी बंद किए गए कूड़ा घर के बगल में और पास के नाले में फिर से कूड़ा उड़ेलना शुरू हो गया। नतीजा—नाला चोक होने की कगार पर है और बदबूदार पानी का बहाव बच्चों के स्कूल के ठीक पास से गुजर रहा है। स्वच्छता अभियान का यह “साइड इफेक्ट” अब सीधे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डालने लगा है।
21 जनवरी को दून सिटिजन फोरम की बैठक में स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना ने कूड़ा डालने वालों पर आर्थिक दंड और सीसीटीवी निगरानी की बात कही थी। लेकिन जमीन पर स्थिति वही है—न दंड दिखा, न कैमरे, सिर्फ आश्वासन दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कूड़ा डालने की तस्वीरें मुख्य नगर अधिकारी तक भी भेजी जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई अब तक फाइलों की गलियों में ही घूम रही है।
अब सवाल यह उठता है कि देहरादून कूड़ा मुक्त हो रहा है या सिर्फ “घोषणा मुक्त”? शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर यह दृश्य एक तंज बनकर खड़ा है।
नागरिक जगमोहन मेंदीरत्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की है कि वे अपने स्तर पर हस्तक्षेप कर देहरादून को फिर से सुंदर और स्वच्छ बनाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करें—ताकि कूड़ा सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी हटता हुआ नजर आए।

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