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बेल्टों से पीटकर शर्मनाक रैगिंग : वार्डन की त्वरित कार्रवाई, दो छात्र निष्कासित

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (पटेल नगर, देहरादून) में हुई है घटना

देहरादून | देश की एजुकेशनल हब माने जाने वाले देहरादून से एक बार फिर शर्मनाक रैगिंग का मामला सामने आया है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (पटेल नगर, देहरादून) में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर एमबीबीएस छात्रों के साथ कथित तौर पर रैगिंग और बेल्टों से मारपीट किए जाने के आरोप लगे हैं। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुरुष छात्रावास के चीफ वार्डन ने 2023 और 2024 बैच के दो छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।

कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. गीता जैन ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एंटी-रैगिंग कमेटी इस घटना की विस्तार से जांच कर रही है। पीड़ित और आरोपी छात्रों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और कॉलेज परिसर में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री का सख्त रुख

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विभागीय अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने तक आरोपी छात्रों को डिबार किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर अन्य छात्रों व संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ कर तथ्य सामने लाए जाएं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि रैगिंग जैसी घटनाएं संस्थागत अनुशासन पर सवाल खड़े करती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कदम उठाए जाएं।

कॉलेज प्रशासन के अनुसार, जूनियर छात्र की शिकायत मिलने के बाद पुरुष छात्रावास के चीफ वार्डन ने तत्काल प्रभाव से 2023 और 2024 बैच के दो छात्रों को हॉस्टल से बाहर कर दिया है। जांच प्रक्रिया पूरी होने तक इन छात्रों को छात्रावास में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

स्थायी निष्कासन और जुर्माने की संभावना

कॉलेज प्रशासन ने बताया कि एंटी-रैगिंग कमेटी ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। पीड़ित छात्र की शिकायत के आधार पर आरोपियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और रिपोर्ट शीघ्र सौंप दी जाएगी। भारत में रैगिंग को गंभीर अपराध माना जाता है और सुप्रीम कोर्ट, यूजीसी तथा राज्य कानूनों के तहत इसके लिए सख्त दंड का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर स्थायी निष्कासन, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

 

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