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उत्तर भारत में सूखी सर्दी का कहर, 25 साल में सबसे शुष्क रहा दिसंबर

फसलों और जल संकट की आशंका

देश के उत्तरी हिस्सों में इस बार सर्दी का मिजाज सामान्य से बिल्कुल अलग और चिंताजनक बना हुआ है। मौसम एजेंसी स्कायमेट वेदर के अनुसार, पिछला दिसंबर बीते 25 वर्षों में सबसे शुष्क रहा। वर्ष 1999 के बाद यह पहली बार है जब दिसंबर महीने में इतनी कम वर्षा दर्ज की गई। आमतौर पर देशभर में दिसंबर में औसतन 15.9 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार महज 4.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 69 प्रतिशत कम है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालात और भी गंभीर हैं। यहां पिछले 92 दिनों यानी 7 अक्टूबर के बाद से, बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरी है। यह सूखे का एक असामान्य रूप से लंबा दौर माना जा रहा है, जिसका असर वायु गुणवत्ता, तापमान और जनजीवन पर साफ नजर आ रहा है।

आमतौर पर दिसंबर-जनवरी के दौरान ‘चिल्लाई कलां’ के समय जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी होती है, लेकिन इस बार श्रीनगर, औली, शिमला और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी लगभग नदारद है। केवल गुलमर्ग और पहलगाम के ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर पर्यटन, विंटर स्पोर्ट्स और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फ की कमी से ग्लेशियरों का पुनर्भरण प्रभावित होगा, जिसका असर आने वाली गर्मियों में जल स्रोतों और हाइड्रो पावर परियोजनाओं पर पड़ सकता है।

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में इस बार ‘शीतलहर’ से ज्यादा ‘कोल्ड डे’ की स्थिति देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण घने कोहरे की ऊपरी परत है। कोहरा जमीन से थोड़ा ऊपर ठहर गया है, जिससे क्षैतिज दृश्यता तो बनी हुई है, लेकिन सूरज की रोशनी धरती तक नहीं पहुंच पा रही है। धूप न निकलने के कारण दिन का तापमान सामान्य से कई डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है और दिनभर ठिठुरन बनी हुई है।

लगातार शुष्क मौसम और गिरते न्यूनतम तापमान के कारण राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई इलाकों में पाला पड़ने की आशंका बढ़ गई है। बारिश के अभाव में रबी की फसलें खासकर गेहूं और सरसों, प्रभावित हो सकती हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यदि 20 जनवरी तक बारिश नहीं होती तो सिंचाई संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले खरीफ सीजन के लिए जलस्तर की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

मौसम विभाग और स्कायमेट के अनुसार,अगले 10 दिनों तक किसी प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत पहुंचने की संभावना नहीं है। ऐसे में 18–19 जनवरी तक सूखी सर्दी, कोल्ड डे और धुंधला मौसम बने रहने के आसार हैं।

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