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सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क है, यह सड़कों के गड्ढे हैं या गड्ढों की ही सड़क है

श्री मुक्तसर साहिब से फिरोजपुर तक सफर बना यातना

श्री मुक्तसर साहिब। पंजाब में श्री मुक्तसर साहिब से फिरोजपुर तक की सड़क पर सफर करना किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं। हालत यह है कि कभी लगता है सड़क गड्ढों में समा गई है, तो कभी गड्ढे ही सड़क बन गए हैं। यह मार्ग पिछले कई सालों से मरम्मत की बाट जोह रहा है, मगर नेताओं के वादों और विभागीय कागज़ी योजनाओं के बीच सड़क अब मौत का जाल बनता जा रहा है।

श्री मुक्तसर साहिब से फिरोजपुर तक जाने वाला मुख्य मार्ग इस कदर जर्जर हो चुका है कि यह पहचानना भी मुश्किल हो गया है कि सड़क कहां है और गड्ढे कहां। बरसात के चलते हालत और खराब हो गए हैं। जगह-जगह गड्ढों में पानी भरा हुआ है, मिट्टी इतनी चिकनी हो गई है कि पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं।

बस या कार, हर सफर यातना

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इस मार्ग पर सफर करना अब केवल कठिन नहीं बल्कि यातना बन चुका है। बस में बैठने वाले यात्रियों का कहना है कि झटकों से पूरा शरीर हिल जाता है—कभी सिर छत से टकराता है तो कभी सीट से उछलकर पैर ठुक जाते हैं। । सफर के दौरान झटकों से मानो पूरा शरीर हिलकर रह जाता है। कार और छोटे वाहनों के ड्राइवर बताते हैं कि गहरे गड्ढों में फंसने से गाड़ियों की हालत रोज़ बिगड़ती है और हर सफर के बाद मरम्मत करानी पड़ती है।

सालों से अधर में लटका विकास

स्थानीय लोग बताते हैं कि इस सड़क की हालत कम से कम पांच-छह सालों से खराब है। वर्ष 2020 में PWD ने 2.25 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत का दावा किया था, लेकिन यह पैचवर्क कुछ महीनों में ही उखड़ गया। बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं, क्योंकि गहरे गड्ढों में पानी भरकर हादसों को न्योता देते हैं।

फंड और राजनीति के बीच फंसा मार्ग

राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच फंड का मुद्दा भी इस मार्ग की बदहाली की बड़ी वजह है।

PWD के मुताबिक, कई बार मरम्मत की योजनाएँ बनीं लेकिन फंड रिलीज़ न होने से अधूरी रह गईं। केंद्र की ओर से ग्रामीण विकास निधि (RDF) में कटौती और ₹9,000 करोड़ की ग्रांट रोक दिए जाने से सड़क सुधार का काम और अटक गया है।

सीएम भगवंत मान की घोषणा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा की थी कि पंजाब में बारिश के बाद ग्रामीण इलाकों की 19,000 किमी सड़कों के सुधार का बजट मंजूर कर दिया गया है। इसमें श्री मुक्तसर साहिब से फिरोजपुर जैसी जर्जर सड़कों को भी दुरुस्त करने की योजना शामिल है। हालांकि, जनता का सवाल यही है कि यह घोषणा ज़मीनी हकीकत में कब बदलेगी।

जनता का सवाल: आखिर कब तक?

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से सड़क की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। बरसात में पानी भर जाने से न तो गड्ढों की गहराई का अंदाजा लग पाता है और न ही सड़क पर किसी तरह की सुरक्षा का एहसास होता है। कई बार वाहन चालक हादसों का शिकार भी हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि यह मुद्दा अब मुख्यमंत्री भगवंत मान के संज्ञान में भी आना चाहिए। जनता की साफ मांग है कि मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करें और तुरंत सड़क निर्माण या मरम्मत का काम शुरू करवाएं।

गांवों के लोग अब खुले शब्दों में कह रहे हैं—“नेताओं ने इस सड़क को सुधारने का वादा तो हर चुनाव में किया, लेकिन हमारी तकलीफ़ें सुनने वाला कोई नहीं। क्या टैक्स इसलिए भरते हैं कि हमें सड़क पर जिंदा झुलाया जाए?”

नतीजा: श्री मुक्तसर साहिब से फिरोजपुर तक की सड़क अब केवल टूटी-फूटी नहीं रही, बल्कि यह विकास की असफलता और राजनीतिक उदासीनता की कहानी बन चुकी है। सवाल यही है कि सड़क पहले बनेगी या जनता का सब्र पहले टूटेगा?

 

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