अन्य प्रदेशस्वास्थ्य
Trending

19 साल की शादी और 10 बेटियों के बाद पैदा हुआ बेटा, लेकिन यह खबर खुश क्यों नहीं करती ?

सुरक्षित डिलीवरी, लेकिन सोच अब भी असुरक्षित

शादी के बाद 19 साल में 11 बार मां बनी महिला

खबर बेटे के जन्म की है, लेकिन तालियां बजाने से पहले सवाल खड़े हो जाते हैं। एक 37 वर्षीय महिला ने 19 साल के वैवाहिक जीवन में 10 बेटियों के बाद आखिरकार एक बेटे को जन्म दिया है। यह डिलीवरी चिकित्सकीय रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता और सही इलाज के चलते मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस घटना ने न सिर्फ लोगों का ध्यान खींचा है, बल्कि बेटे की चाह से जुड़ी सामाजिक सोच पर भी नई बहस छेड़ दी है।

हाई रिस्क डिलीवरी, मां की सेहत पर खतरा और परिवार की आर्थिक मजबूरियां—इन सबके बीच यह मामला उस सोच को आईना दिखाता है, जो आज भी बेटे को प्राथमिकता देती है।

यह मामला हरियाणा के जींद जिले के उचाना कस्बे का है, जहां ओजस हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी होम में महिला की डिलीवरी कराई गई। डिलीवरी कराने वाले डॉ. नरवीर श्योराण ने बताया कि यह हाई रिस्क केस था, लेकिन उनकी पूरी टीम ने सावधानी बरती। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष ने पूरी निगरानी में सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित की।

डॉ. श्योराण के मुताबिक,

“महिला को डिलीवरी के दौरान तीन यूनिट खून चढ़ाना पड़ा। आखिर में नॉर्मल डिलीवरी हुई और सब कुछ अच्छे से मैनेज हो गया।”

डिलीवरी के अगले ही दिन महिला को छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद वह फतेहाबाद जिले स्थित अपने गांव लौट गई। महिला के पति संजय कुमार मजदूरी का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2007 में हुई थी और अब उनके कुल 11 बच्चे हैं—10 बेटियां और एक बेटा। संजय ने कहा,

“हम चाहते थे कि एक बेटा हो। मेरी बड़ी बेटियां भी भाई चाहती थीं। जो हुआ, वह भगवान की मर्जी थी।”

संजय का कहना है कि उनकी सभी बेटियां स्कूल जाती हैं और सबसे बड़ी बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ रही है।

“कम कमाई में भी मैं बेटियों को अच्छी शिक्षा देने की कोशिश कर रहा हूं,” उन्होंने बताया।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल हो गई। एक वीडियो में जब संजय से उनकी 10 बेटियों के नाम पूछे गए तो वह कई बार अटकते नजर आए। वीडियो को लेकर जहां कुछ लोग इसे परिवार की निजी खुशी बता रहे हैं, वहीं कई लोग इसे आज भी जीवित बेटा-प्राथमिकता वाली सोच से जोड़कर देख रहे हैं।

लिंगानुपात और सामाजिक सोच पर सवाल

यह घटना एक बार फिर उस मानसिकता को उजागर करती है, जिसमें बेटे को प्राथमिकता दी जाती है। हरियाणा का लिंगानुपात लंबे समय से चिंता का विषय रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं समाज में गहराई से जमी सोच को सामने लाती हैं।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button