शिक्षक दिवस पर गूंजा संविधान का संदेश, लॉ छात्रों ने लिया विधिक साक्षरता का संकल्प

मायादेवी यूनिवर्सिटी के विधि छात्रों ने संविधान और ‘रूल ऑफ लॉ’ के प्रति जताई प्रतिबद्धता
देहरादून। मायादेवी यूनिवर्सिटी के विधि विभाग के छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर समाज में विधिक साक्षरता बढ़ाने और संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। छात्रों ने ‘रूल ऑफ लॉ’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि एक जागरूक समाज के निर्माण में कानून की समझ और संवैधानिक मूल्यों की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में शिक्षक दिवस के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा गया कि वर्ष 1966 में यूनेस्को की शिक्षकों की स्थिति से संबंधित अनुशंसा के बाद से शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बदलती तकनीक, जलवायु परिवर्तन, प्रवासन और विस्थापन जैसी नई चुनौतियों के बीच शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक चुनौतियों को समझने और उनके समाधान में योगदान देने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
इस वर्ष शिक्षक दिवस की थीम “शिक्षकों के साथ खड़े रहना : भविष्य को आकार देने के 60 वर्ष” रखी गई है। कार्यक्रम में शिक्षकों की सामाजिक भूमिका, विद्यार्थियों की जिम्मेदारी और बदलते दौर में शिक्षा की चुनौतियों पर विचार साझा किए गए।
इस अवसर पर विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि सामाजिक चुनौतियों की पहचान, उनसे निपटने की रणनीति और समाज के उत्थान के लिए प्रभावी नीति निर्माण एवं जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल कानून की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में विधिक जागरूकता फैलाने और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में भी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने छात्रों से नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विधि विभाग के छात्र-छात्राओं ने भारतीय संविधान के प्रति अपनी आस्था और प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए अपने विचार साझा किए। इनमें सुधीर कुमार, कामना यादव, निशा कुमारी राय, मीनाक्षी कुमारी, माधव बंसल, ऋषव दुबे, महिमा, हुमेरा, वंशिका आर्या, कनिष्का चंद्रा, यश सोम, संजीव कुमार और अली हमजा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विधि विभाग के शिक्षक डॉ. प्रमोद कुमार, श्रीमती रवीशा कुरियाल, श्रीमती भावना अरोड़ा और कुमार मयंक की प्रमुख भूमिका रही। अंत में विधि विभाग के डीन प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने सभी प्रतिभागियों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया।




