कारगिल विजय दिवस: सैनिक सम्मान और ओजस्वी कविताओं से गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर

मुख्यमंत्री धामी ने वीर सैनिकों का किया सम्मान, ओजस्वी कविताओं ने बांधा समां
देहरादून। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित कर उनके अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्रसेवा को नमन किया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी ओजस्वी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, वीरता और सामाजिक सरोकारों का संदेश दिया।
कार्यक्रम में देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के डॉ. अनिल दीक्षित ने अपनी ओजपूर्ण कविता “धरा पे गंगा, गगन तिरंगा है हमारी शान, देश के खातिर मिटने वाले सैनिक तुम्हें सलाम” का प्रभावशाली पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे सभागार को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत कर दिया और उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
मंच संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि श्री कान्त शर्मा ने अपनी रचना के माध्यम से महाभारत के श्रीकृष्ण और गांधारी के मर्मस्पर्शी प्रसंग का भावपूर्ण चित्रण प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
दिल्ली से आए कवि गजेंद्र सोलंकी ने वीर रस की रचनाओं का पाठ करते हुए युवाओं से मातृभूमि की रक्षा करने वाले सैनिकों का सदैव सम्मान करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
बिहार के मधुबनी से आईं कवयित्री वर्षा ठाकुर ने नारी शक्ति और समाज में महिलाओं के संघर्ष पर अपनी प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “अबला नहीं मैं नारी हूँ, हालातों से कभी न हारी हूँ।” उनकी रचना को श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के अंत में कवयित्री महीमा श्री ने सभी अतिथियों, श्रोताओं और सम्मानित सैनिकों का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रप्रेम, वीर जवानों के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
कारगिल विजय दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान को याद करते हुए राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की। सैनिक सम्मान और ओजस्वी कविताओं से सजे इस आयोजन ने उपस्थित सभी लोगों के मन में देश के प्रति गर्व और समर्पण की भावना को और प्रबल कर दिया।



