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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली पर देवभूमि यूनिवर्सिटी में विशेषज्ञों ने साझा किए नवाचार और अनुभव

शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों ने नई शिक्षा नीति के प्रभावों पर किया विस्तृत मंथन

देवभूमि उत्तराखण्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर पाँच दिवसीय एफडीपी का समापन

देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एलाइड साइंस विभाग द्वारा भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System-IKS) विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Programme-FDP) का सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन नई शिक्षा नीति, भारतीय ज्ञान परंपरा और उच्च शिक्षा में इसके महत्व पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रोफेसर (डॉ.) शक्ति मनूचा ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रभावी रूप से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल देश की सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा को समृद्ध बनाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रोफेसर आर.के. त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकार के संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार लाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित यह पहल शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए लाभकारी साबित होगी।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विधि विभाग के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा, “इतिहास भविष्य की अदालत होता है। हम आज जो कार्य करेंगे, उसका मूल्यांकन भविष्य करेगा और यही तय होगा कि हमारे प्रयासों से समाज को क्या लाभ मिला।” उन्होंने शिक्षकों से शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालय की आईक्यूएसी (IQAC) की निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) आरती खंडूड़ी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लागू होने के बाद उच्च शिक्षा में आए सकारात्मक बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कदम है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर स्कूल ऑफ एलाइड साइंस की डीन एवं एफडीपी की संयोजक प्रोफेसर (डॉ.) शिखा भास्कर ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी रिसोर्स पर्सन्स, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा मिले सहयोग के लिए भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

समापन समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधकर्ता, विषय विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में शिक्षाविद उपस्थित रहे।

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