
सूर्यकांत धस्माना बोले : राजधानी में नौ दिन से वकील बैठे हैं धरने पर, पर सरकार सुन नहीं रही
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अपने चैंबरों के निर्माण की मांग को लेकर पिछले नौ दिनों से हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं के आंदोलन को सोमवार को कांग्रेस का भी खुला समर्थन मिला। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना कांग्रेस की ओर से समर्थन देने वकीलों के धरने स्थल पहुंचे और करीब दो घंटे उनके साथ धरने में बैठे।
पुराने न्यायालय परिसर में रैन बसेरा के विरोध में अधिवक्ताओं के चल रहे आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन: गणेश गोदियाल बुधवार को देहरादून हरिद्वार रोड पर न्यायालय परिसर के बाहर चल रहे अधिवक्ताओं के धरने में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौक़े पर अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए गोदियाल ने कहा कि बड़ी विडम्बना है कि सरकार कोर्ट परिसर के बीचों बीच रैन बसेरा बनाने की बात कर रही है ये बात कुछ हज़म नहीं हो रही है कि केंद्र की एजेंसियों को पूरे देहरादून में रैन बसेरा के लिए कोर्ट के दो परिसरों के बीच की ही जगह मिली, सरकार को ये समझ नहीं है कि कल जब नई पीढ़ी आगे आएगी वो न्याय व्यवस्था का हिस्सा बनेगी उसे बैठने की जगह कहाँ मिलेगी। उन्होंने कहा राज्य की उम्र कोई पच्चीस तीस साल तो होती नहीं हज़ारो साल होती है न्यायिक कार्यों के लिए आगे सरकार को कुछ करना तो होगा अधिवक्ताओ के लिए तो कहा जाएँगे, रैन बसेरा तो कहीं भी बनाया जा सकता है, पर वकीलों के चैम्बर दो किलोमीटर दूर तो नहीं बनाये जा सकते ना तो सरकार को अपने निर्णय पर पुनः विचार करना चाहिए।
धस्माना ने भी अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह अत्यंत अफसोसनाक है कि राज्य की राजधानी, जहां मुख्यमंत्री से लेकर पूरी कैबिनेट, राज्यपाल और मुख्य सचिव बैठे हैं, वहीं के अधिवक्ता नौ दिनों से हड़ताल कर रहे हैं और सरकार उनकी सुनवाई तक नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि वकीलों की चैंबर निर्माण की मांग पूरी तरह वाजिब है। सुबह से शाम तक धरने पर बैठने के बावजूद सरकार की उदासीनता चिंताजनक है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि नए जिला न्यायालय भवन तैयार कर लिए गए, लेकिन उन अदालतों में पैरवी करने वाले वकीलों के बैठने की व्यवस्था तक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जब जिला न्यायालय परिसर का निर्माण शुरू हुआ था, उसी समय वकीलों के चैंबर भी साथ बनाए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि सभी अदालतें नए परिसर में शिफ्ट हो गईं, जबकि वकीलों को अपने पुराने परिसर से सड़क पार करके नए परिसर में आना पड़ रहा है। धस्मानाने मांग की कि पुराने परिसर का एक हिस्सा वकीलों के चैंबर निर्माण के लिए आवंटित किया जाए और पुराने व नए परिसर को जोड़ने के लिए अंडरपास का निर्माण किया जाए, ताकि आवागमन सुगम हो सके।
धस्माना ने कहा कि चैंबरों का निर्माण राजकीय कोष से होना चाहिए और सरकार की यह जिम्मेदारी है कि उन्हें अधिवक्ताओं को विधिवत आवंटित करे। उन्होंने कहा कि वकील अपनी मांगों को मनवाने के लिए जो भी आंदोलनात्मक कदम उठाएंगे, कांग्रेस पार्टी उनका पूर्ण समर्थन करेगी।
धरने में धस्माना के साथ प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, एडवोकेट संदीप चमोली, एडवोकेट विपुल नौटियाल, एडवोकेट राजेश गुरुंग और एडवोकेट केके गोयल भी मौजूद रहे। बार काउंसिल की पूर्व अध्यक्ष रज़िया बेग, पूर्व उपाध्यक्ष एम.एम. लांबा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, सचिव राजबीर सिंह बिष्ट, पूर्व अध्यक्ष राजीव शर्मा बंटू और संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेम चंद शर्मा ने आंदोलन का समर्थन करने पर धस्माना का आभार जताया।




