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माध्यमिक शिक्षा में एआई और कम्प्यूटिंग थिंकिंग को पाठ्यक्रम में शामिल करें राज्य सरकारें : डॉ. अनिल कुमार दीक्षित

देहरादून।

मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में देशभर के विधि-विशेषज्ञों और न्यायिक अधिकारियों ने “ह्यूमन राइट्स इन डिजिटल एरा” विषय पर मंथन किया। इस अवसर पर तकनीक के बढ़ते प्रभाव और डिजिटल युग में मानवाधिकारों की चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उत्तरांचल यूनिवर्सिटी देहरादून के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि आज कम्प्यूटिंग थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव जीवन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है जब राज्य सरकारों को माध्यमिक शिक्षा स्तर पर एआई और कम्प्यूटिंग थिंकिंग को बतौर पाठ्यक्रम शामिल करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी तकनीकी रूप से सक्षम और जागरूक बन सके।”

मुख्य अतिथि हरिद्वार के जनपद न्यायाधीश श्री नरेन्द्र दत्त ने बढ़ते साइबर अपराधों और प्राइवेसी के उल्लंघन पर चिंता जताई और समाज में साइबर जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। वहीं, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री संदीप कुमार ने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मदरहुड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर नरेन्द्र शर्मा ने कहा कि विधि के छात्र बदलते समय के साथ तकनीक और नैतिकता का संतुलन बनाते हुए अपनी नई पहचान गढ़ें।

बीएचयू के प्रोफेसर शैलेन्द्र गुप्ता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की तरह अब जिला न्यायालयों में भी तकनीकी साधनों के प्रयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम बन सके।

सेमिनार में एमिटी यूनिवर्सिटी हरियाणा के प्रोफेसर एके भट्ट, लॉ कॉलेज प्रयागराज के डॉ. संजय बर्नवाल, लॉ स्कूल नोएडा के प्रोफेसर के. बी. अस्थाना, और गढ़वाल यूनिवर्सिटी के डॉ. सुधीर चतुर्वेदी सहित देशभर से आए कई विधि विशेषज्ञों, शोधार्थियों और छात्रों ने भाग लिया।

अंत में, यूनिवर्सिटी के संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर जे. पी. श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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