
पेपर लीक प्रकरण पर सीबीआई जांच की सिफारिश
देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया है। पेपर लीक और प्रश्नपत्र के कुछ हिस्सों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आयोग ने परीक्षा की शुचिता, गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह बड़ा निर्णय लिया।
आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने बताया कि परीक्षा के दौरान हरिद्वार के एक केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पेज मोबाइल के माध्यम से बाहर आए थे, जो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जांच में सामने आया कि खालिद मलिक नामक व्यक्ति ने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को प्रश्नपत्र भेजा था, जबकि इस साजिश में उसकी बहन साबिया की भी भूमिका पाई गई। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार हरकत में
पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद अभ्यर्थियों में आक्रोश फैल गया। बेरोजगार संगठन के सदस्यों ने देहरादून परेड ग्राउंड में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद छात्रों से संवाद के लिए पहुंचे और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। सीएम ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच कराई जाएगी, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन स्थगित किया।
राजनीतिक और जनदबाव के बीच बड़ा फैसला
शुक्रवार को भाजपा विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर परीक्षा रद्द करने की मांग की। इसके बाद सरकार ने शनिवार को परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी किया और नई परीक्षा शीघ्र घोषित करने की बात कही।
जांच आयोग ने सौंपी अंतरिम रिपोर्ट
परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित एकल सदस्यीय आयोग ने मुख्यमंत्री को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी कर रहे हैं। आयोग ने देहरादून, हल्द्वानी समेत कई शहरों में जनसंवाद आयोजित कर अभ्यर्थियों व शिक्षकों की राय सुनी। रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने आयोग के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि, “राज्य सरकार परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। अभ्यर्थियों के हित में हर संभव निर्णय लिया जाएगा।”



