
भक्तों ने किया भव्य स्वागत
लक्ष्मण सिंह नेगी, ज्योर्तिमठ।
भगवती कालिंका मेदयूल धार देवी की यात्रा पंचकेदार में चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ धाम पहुंची। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए लगभग 16 किलोमीटर की कठिन यात्रा के बाद डोली ने अपने आराध्य भगवान शिव रुद्रनाथ के दर्शन किए।
यात्रा का प्रारंभ पारंपरिक रूप से भरकी गांव से हुआ। कल्पेश्वर होते हुए डोली ने उर्गम स्थित घंटाकर्ण मंदिर में प्रथम चरण की यात्रा संपन्न की, जहां क्षेत्रपाल देवता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वांसा गांव में दो दिन का विश्राम हुआ। डुमक गांव में वजीर देवता (वीरभद्र) के मंदिर में देवी ने विश्राम किया, यहां ग्रामीणों ने डोली का भव्य स्वागत किया।
रुद्रनाथ पहुंचने पर पुजारी संदीप तिवारी ने देवी की डोली का विधि विधान से स्वागत किया और भत्ता अर्पित किया। मंदिर में पूर्व पुजारी और कथावाचक महादेव भट्ट ने भंडारे का आयोजन किया। दर्शन के बाद डोली वापस उर्गम के घंटाकर्ण मंदिर पहुंची।
यात्रा के दौरान डुमक, कलगोठ, जखुडा, वांसा और उर्गम गांवों में श्रद्धालुओं ने देवी की रथ यात्रा का भव्य स्वागत किया। आगे यह यात्रा सलना गांव जाएगी, जहां रात्रि में पारंपरिक मुखौटा नृत्य किया जाएगा। इस नृत्य में धार्मिक कथाएं, स्थानीय संस्कृति और बोली-भाषा का जीवंत प्रस्तुतीकरण होता है। दिन में देवी की डोलियों का नृत्य और रात्रि में हास्य-व्यंग्य के माध्यम से ग्रामीणों का मनोरंजन भी किया जाता है।
यात्रा के समापन पर भगवती ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए आश्वस्त किया कि वह शीघ्र ही प्रवास के लिए अपने गांव लौटेंगी। अश्रुपूर्ण नेत्रों से ग्रामीण महिलाओं ने भगवती को विदाई दी।



