
देहरादून: नकल विरोधी कानून के तहत दर्ज मामले की जांच में एसआईटी ने खालिद के घर पर छापेमारी की। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि वहां से कोई अध्ययन सामग्री या किताबें नहीं मिलीं। यह खुलासा खालिद की नीयत पर और सवाल खड़े करता है।
क्या है खालिद की असलियत?
2023 से 2025 के बीच खालिद ने नौ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन किया। इनमें से पांच में वह शामिल नहीं हुआ और बाकी परीक्षाओं में उसके अंक बेहद कम रहे। साफ है कि तैयारी के बिना ही वह बार-बार परीक्षा में शामिल होता रहा।
पात्रता के बिना आवेदन, शक बढ़ा
खालिद ने कुछ ऐसी परीक्षाओं के फॉर्म भी भरे, जिनके लिए वह शैक्षिक रूप से योग्य नहीं था। सवाल यह उठता है कि जब न तैयारी थी और न योग्यता, तो वह बार-बार परीक्षाओं में क्यों हाथ आजमा रहा था।
शक की सुई और गहरी हुई
एसआईटी के जांच में यह संदेह और पुख्ता हो गया है कि खालिद का असली मकसद नौकरी पाना नहीं बल्कि भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगाकर पेपर लीक करना और पैसा कमाना था। यही वजह रही कि उसने UKSSSC की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में भी प्रवेश लिया और बहादुरपुर परीक्षा केंद्र से पेपर लीक कर गंभीर अपराध का मास्टरमाइंड बन बैठा।
एसआईटी की कड़ी निगरानी
जांच टीम यह पता लगा रही है कि जिन परीक्षाओं में खालिद पात्रता के बिना शामिल हुआ, उनका उद्देश्य क्या था। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि उसके संपर्क में कौन लोग थे और परीक्षा केंद्र से पेपर बाहर निकालने की उसकी रणनीति क्या थी।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़, शिकंजा कसा जाएगा
खालिद की इस करतूत ने न केवल उत्तराखंड की भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए, बल्कि हजारों बेरोजगार युवाओं के भविष्य से भी खिलवाड़ किया। एसआईटी की सख्त जांच और आयोग की निगरानी से इस पेपर लीक कांड की हर परत उजागर की जाएगी।
आयोग का सख्त रुख
जस्टिस यूसी ध्यानी ने परीक्षा केंद्र का निरीक्षण कर प्रधानाचार्य और स्टाफ से गहन पूछताछ की। उन्होंने पेपर वितरण, सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा इंतजाम और कर्मचारियों की भूमिका पर रिपोर्ट तलब की और स्पष्ट चेतावनी दी कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



