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एक दरार जो बदल देगी नक्शा

धरती के भीतर छिपा खौफ़ : एक दिन आ सकता है ‘द बिग वन’

धरती के भीतर छिपा है एक ऐसा रहस्य, जो कभी भी दुनिया का नक्शा बदल सकता है। जानिए क्या है ‘द बिग वन’ और क्यों इससे डरते हैं वैज्ञानिक…

धरती के भीतर एक ऐसी दरार मौजूद है, जो न केवल विज्ञान का रहस्य है बल्कि करोड़ों लोगों के लिए संभावित खतरे का संकेत भी। यह दरार करीब 745 मील (लगभग 1,100 किलोमीटर) तक फैली है और धरती के सीने में लगभग 20 मील गहराई तक जाती है। यहाँ धरती की दो विशाल टेक्टोनिक प्लेटें आमने-सामने खड़ी हैं और लगातार एक-दूसरे से रगड़ खाती रहती हैं।

धीरे-धीरे जमा होता यह दबाव जब अचानक फूटता है तो धरती कांप उठती है। यही वजह है कि वैज्ञानिक वर्षों से चेतावनी दे रहे हैं कि एक दिन यहाँ “द बिग वन” नाम का भूकंप आ सकता है — ऐसा भूकंप जो पूरे क्षेत्र का नक्शा ही बदल दे।

इतिहास की गवाही

इस दरार ने पहले भी अपने विनाशकारी रूप दिखाए हैं।

1906 : 7.9 तीव्रता के भूकंप ने बड़े शहर को तबाह कर दिया। लगभग 3,000 लोग मारे गए और उसका 80 प्रतिशत हिस्सा खंडहर में बदल गया।

1989 : 6.9 तीव्रता के लोमा प्रीटा भूकंप ने खाड़ी क्षेत्र को हिला दिया। इसमें 63 लोगों की मौत और 3,700 से अधिक घायल हुए। पुल टूट गए, इमारतें ढह गईं और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ।

ये घटनाएँ केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की चेतावनी भी हैं।

डर और आकर्षण का संगम

दिलचस्प बात यह है कि यह दरार लोगों के आकर्षण का भी केंद्र है। यहाँ हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, ताकि वे उस जगह को देख सकें जहाँ धरती की प्लेटें मिलती हैं। कुछ आगंतुकों का कहना है कि यहाँ से गहराई में से आती अजीब-सी हल्की आवाज़ें सुनाई देती हैं — मानो धरती खुद हमें याद दिला रही हो कि वह जीवित और गतिशील है।

वैज्ञानिकों की निगरानी

भूगर्भीय संस्थान और वैज्ञानिक दशकों से इस दरार की निगरानी कर रहे हैं। सेंसर और आधुनिक तकनीक की मदद से हर हलचल को दर्ज किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप के सटीक समय का अनुमान लगाना असंभव है, लेकिन तैयारी और सतर्कता से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

जब धरती लेगी करवट

विशेषज्ञों की मानें तो “द बिग वन” आने पर सड़कें, पुल, बिजली, पानी और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। लाखों लोग बेघर हो सकते हैं और पूरी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।

धरती की चेतावनी

यह दरार हमें लगातार यह सिखाती है कि चाहे इंसान कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, प्रकृति के सामने उसकी हैसियत छोटी ही रहेगी। यह केवल भूगोल का हिस्सा नहीं, बल्कि धरती की अपार शक्ति का प्रतीक है — जो हर पल बदलती है और हमें भी बदल देती है।

यह दरार अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया राज्य में स्थित है, जिसे दुनिया सैन एंड्रियास फॉल्ट के नाम से जानती है।

स्रोत : यू.एस. जियोलॉजिकल सर्वे (USGS), यू.एस. फ़ॉरेस्ट सर्विस

सैन एंड्रियास फॉल्ट — एक नज़र में

लंबाई : लगभग 1,100 किलोमीटर (745 मील)

गहराई : करीब 20 मील (32 किलोमीटर) धरती के भीतर

स्थिति : कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका

पहचान : पैसिफ़िक और नॉर्थ अमेरिकन टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा

बड़े भूकंप :

1906, सैन फ्रांसिस्को – 7.9 तीव्रता, 3,000 मौतें

1989, लोमा प्रीटा – 6.9 तीव्रता, 63 मौतें, 3,700 घायल

संभावित खतरा : “द बिग वन” नामक भूकंप की आशंका, जिससे दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया का नक्शा बदल सकता है

क्या है “द बिग वन”?

अर्थ : भविष्य में आने वाला संभावित महाभूकंप

कैसा होगा : तीव्रता 8.0 या उससे अधिक

संभावित असर :

  • सड़कें और पुल टूट सकते हैं
  • बिजली, पानी और संचार व्यवस्था ठप
  • लाखों लोग बेघर हो सकते हैं
  • अरबों डॉलर का नुकसान संभव

चेतावनी : वैज्ञानिक मानते हैं कि सबसे बड़ा खतरा दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया में है

समय अनिश्चित : भूकंप का समय बताना असंभव, लेकिन तैयारी ज़रूरी।

 

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