
साइकिलिंग क्लब अध्यक्ष हरिसिमरन सिंह ने मेट्रो, साइकिल लेन और मसूरी में नियंत्रित वाहन प्रवेश का दिया सुझाव
देहरादून। 2, 3 और 5 अक्टूबर को देहरादून-मसूरी समेत शहर के प्रमुख मार्गों पर लगे भीषण जाम ने यातायात व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। घंटों तक वाहन रेंगते रहे, जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होने की स्थिति बनी।
देहरादून साइकिलिंग क्लब के अध्यक्ष हरिसिमरन सिंह ने कहा कि सप्ताहांत और छुट्टियों में बड़ी संख्या में पर्यटक देहरादून और मसूरी पहुंचते हैं। पर्यटन जरूरी है, लेकिन वाहनों के बढ़ते दबाव से स्थानीय लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस जैसी आपात सेवाएं जाम में फंसना गंभीर चिंता का विषय है और पुलिस-प्रशासन की आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, डीजीपी दीपम सेठ और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों से ट्रैफिक पुलिस की संख्या बढ़ाने, प्रमुख मार्गों पर वैकल्पिक रास्ते और फ्लाईओवर विकसित करने, मेट्रो/मास रैपिड ट्रांजिट को प्राथमिकता देने और सुरक्षित साइकिल लेन बनाने की मांग की। साथ ही ओवरस्पीडिंग, रैश ड्राइविंग और नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पर्यटन मार्गों पर प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन की मांग की।
हरिसिमरन सिंह ने कहा कि मसूरी की भौगोलिक और पर्यावरणीय क्षमता सीमित है। ऐसे में बाहरी निजी वाहनों के लिए प्रवेश या कंजेशन शुल्क लगाने और वाहनों व चालकों के दस्तावेजों के प्रभावी सत्यापन जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने ड्रिंक एंड ड्राइव और गंभीर रैश ड्राइविंग के मामलों में कठोर दंड के साथ लाइसेंस निलंबन या रद्द करने की कार्रवाई पर भी विचार करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि केवल चालान काटने या कुछ समय के लिए पुलिस तैनात करने से जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। देहरादून को साइकिल, मेट्रो और मजबूत सार्वजनिक परिवहन आधारित दीर्घकालिक ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान की जरूरत है। आज ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में शहर की सड़कें वाहनों के दबाव में पूरी तरह चोक हो सकती हैं।


