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17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास, जानिए इस पावन महीने में क्या करें और क्या नहीं

पूजा, दान और आत्मशुद्धि का महापर्व, मांगलिक कार्य रहेंगे वर्जित

श्री सनातन धर्म सभा मंदिर प्रेमनगर, देहरादून के पं. दिनेश गौतम ने बताया पुरुषोत्तम मास का महत्व

देहरादून। सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित माना जाने वाला पुरुषोत्तम मास इस वर्ष 17 मई 2026 (रविवार) से प्रारंभ होकर 15 जून 2026 (सोमवार) तक रहेगा। इसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है। इस बार यह ज्येष्ठ माह में पड़ रहा है, जिसके कारण ज्येष्ठ मास दो माह का होगा।

श्री सनातन धर्म सभा मंदिर, प्रेमनगर, देहरादून के विद्वान ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश गौतम ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की आराधना, तप, दान, व्रत और आत्मशुद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार जिस मास में सूर्य संक्रान्ति नहीं होती उसे अधिकमास, लोंद मास, मल मास य पुरुषोत्तम मास कहते है। इसको सरल शब्दों में समझते है जिस मास में एक अमावस्या से दूसरे अमावस्या के बीच में कोई सूर्य की संक्रान्ति न पड़े उसे अधिक मास कहते है। संक्रान्ति के अर्थ है – सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को कहते है। अधिमास 32 मास 16 दिन तथा चार घड़ी के अन्तर से आता है।

सूर्य और चंद्रमा की गति में अंतर होने के कारण यह अतिरिक्त महीना आता है। सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर बनने के कारण लगभग तीन वर्षों में 33 दिन अतिरिक्त हो जाते हैं और इसी संतुलन के लिए एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।

पुरुषोत्तम मास में क्या करें

भगवान विष्णु की आराधना

पं. दिनेश गौतम के अनुसार इस पूरे महीने भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। प्रतिदिन

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है। विष्णु सहस्रनाम, पुरुष सूक्त और श्रीहरि स्तुति का पाठ भी शुभ माना जाता है।

दान-पुण्य करें

इस माह में घी, गुड़, अनाज, वस्त्र और तांबे के बर्तनों का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। जरूरतमंदों की सहायता करने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं।

दीपदान और पवित्र स्नान

शाम के समय तुलसी के पौधे के पास, मंदिर में या नदी किनारे दीपदान करना शुभ माना गया है। वहीं सूर्योदय से पहले स्नान और गंगाजल मिश्रित जल से स्नान भी पुण्यकारी बताया गया है।

धार्मिक ग्रंथों का पाठ

श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत कथा और रामायण का पाठ या श्रवण मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

सात्विक जीवन अपनाएं

सादा भोजन, संयमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच इस महीने की सबसे बड़ी साधना मानी जाती है।

क्या न करें

मलमास में न करें ये गलतियां 

  • विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों से बचें।
  • नया व्यवसाय, वाहन या घर खरीदने से परहेज करें।
  • मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
  • क्रोध, विवाद, झूठ और निंदा से दूर रहें।
  • विलासिता छोड़कर सादगीपूर्ण जीवन अपनाएं।

पुराणों में वर्णित है पुरुषोत्तम मास की महिमा

पौराणिक कथाओं के अनुसार अधिक मास का कोई स्वामी नहीं था और लोग उसे “मलमास” कहकर तिरस्कृत करते थे। दुखी होकर वह भगवान विष्णु के पास पहुंचा। तब भगवान विष्णु जी ने कहा – “मैं इसे सर्वोपरि – अपने तुल्य करता हूँ। सदगुण, कीर्ति, प्रभाव, षडैश्वर्य, पराक्रम, भक्तों को वरदान देने का सामार्थ्य आदि जितने गुण सम्पन्न हैं, उन सबको मैंने इस मास को सौंप दिया है।’’

अहमेते यथा लोके प्रथितः पुरुषोत्तमः।

तथायमपि लोकेषु प्रथितः पुरुषोत्तमः।।

इन गुणों के कारण जिस प्रकार मैं वेदों, लोकों और शास्त्रों में ʹपुरुषोत्तमʹ नाम से विख्यात हूँ, उसी प्रकार यह मलमास भी भूतल पर ʹपुरुषोत्तमʹ नाम से प्रसिद्ध होगा और मैं स्वयं इसका स्वामी हो गया हूँ।”

इस प्रकार अधिक मास, मलमास ʹपुरुषोत्तम मासʹ के नाम से विख्यात हुआ।

एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान नरसिंह ने हिरण्यकशिपु के वध के लिए इस विशेष काल का निर्माण किया था, क्योंकि हिरण्यकशिपु को वरदान था कि वह वर्ष के 12 महीनों में से किसी में भी नहीं मारा जा सकता।

आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर

पं. दिनेश गौतम ने कहा कि पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और ईश्वर से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। इस महीने में व्यक्ति को सत्कर्म, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।

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