
“अपनी पहचान को समझना अहंकार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास है” : डॉ. अभिषेक जोशी
देहरादून स्थित उत्तराँचल यूनिवर्सिटी की साहित्यिक समिति द्वारा “विश्व अहंकार जागरूकता दिवस” के अवसर पर व्यक्तित्व विकास और सकारात्मक सोच को केंद्र में रखते हुए एक जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को अहंकार और आत्मसम्मान के बीच का अंतर समझाना तथा बेहतर सामाजिक व्यवहार के लिए प्रेरित करना रहा।
सेमिनार में छात्रों को संबोधित करते हुए यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रोफेसर डॉ. अभिषेक जोशी ने कहा कि अपनी विशिष्टता और प्रतिभा को पहचानना अहंकार नहीं बल्कि आत्मविश्वास की निशानी है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि सीखने की प्रवृत्ति और सुनने की क्षमता को कभी कमजोर नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि चरित्र निर्माण से भी जुड़ी होती है।
कार्यक्रम में साहित्यिक समिति के चेयरपर्सन डॉ. अनिल दीक्षित ने कहा कि अहंकार व्यक्ति के व्यवहार और रिश्तों को प्रभावित करने वाली एक मानसिक स्थिति है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक अहंकार व्यक्ति को संवेदनहीन बना देता है और इससे समाज में दूरी तथा संघर्ष की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से विनम्रता और सहानुभूति को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने बताया कि “विश्व अहंकार जागरूकता दिवस” लोगों को यह समझाने का प्रयास करता है कि आत्मसम्मान और अहंकार में बड़ा अंतर होता है। यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में संतुलन बनाए रखे तो वह बेहतर संबंधों और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम में आदर्श कुमार तिवारी, अपूर्वा पुंडीर, ऋषिका वत्स, रश्मी सजवान, कृस्टि पटेल, नर्गिस फातिमा, अनिमेष डबराल, अक्षित गुप्ता, नीलाक्षी, उज्जैनी दंत्रा और असप्रीत बजाज ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का संचालन समिति की सचिव भूमिका रनावत ने किया, जबकि आभार ज्ञापन समिति अध्यक्ष राहुल कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया।




